श्रीकृष्ण जन्म की लीलाओं का हुआ भावपूर्ण मंचन
वृंदावन की रासलीला मंडली ने भक्तिरस में किया श्रद्धालुओं को सराबोर,देर रात तक गूंजते रहे जयकारे

जसवंतनगर,इटावा। नगर की ऐतिहासिक मैदानी रामलीला के लंका मंच पर रविवार देर शाम भगवान श्रीकृष्ण जन्म लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। रात नौ बजे वृंदावन से आई रासलीला मंडली रंगरसिया के कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़े प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। कलाकारों के अभिनय और संवादों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु मौजूद रहे।
रासलीला मंडली के संचालक अवधेश कुमार मिश्रा के निर्देशन में कलाकारों ने श्रीकृष्ण जन्म के प्रसंगों का आकर्षक मंचन किया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की लीला के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों पर श्रद्धालु भावविभोर नजर आए और देर रात तक लीला का आनंद लेते रहे।
पुराणों में रासलीला को भक्ति का माध्यम बताया
धार्मिक मान्यताओं और पुराणों के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं प्रेम, भक्ति और ईश्वर के प्रति समर्पण का संदेश देती हैं। श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध में वर्णित रासपंचाध्यायी में श्रीकृष्ण की रासलीला का विस्तार से वर्णन मिलता है। रासलीला को जीवात्मा और परमात्मा के आध्यात्मिक प्रेम तथा अनन्य भक्ति के प्रतीक के रूप में समझा जाता है। यह संदेश भी मिलता है कि सच्ची भक्ति में अहंकार का त्याग और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण महत्वपूर्ण है।
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अन्याय और अत्याचार के अंत तथा धर्म की स्थापना का प्रतीक माना जाता है। ऐसे धार्मिक मंचनों के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, पौराणिक प्रसंगों और धार्मिक परंपराओं से परिचित होने का अवसर मिलता है।
श्री रामलीला महोत्सव समिति के प्रबंधक राजीव कुमार गुप्ता और उप प्रबंधक ठाकुर अजेंद्र सिंह गौर व शुभश्री गुप्ता के दिशा-निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। मैदानी रामलीला में रामकथा के साथ श्रीकृष्ण की लीलाओं का आयोजन नगर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।



