“दुश्मन का दुश्मन दोस्त…” हूतियों को खुफिया राज दे रहा ये देश, सऊदी अरब के खिलाफ रची जा रही खौफनाक साजिश

Middle East Tension: मिडिल ईस्ट की कूटनीति में एक ऐसा भूचाल आया है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। हमेशा से पक्के दोस्त माने जाने वाले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब के रिश्तों में अब ‘दुश्मन का दुश्मन दोस्त’ वाली थ्योरी लागू होती दिख रही है।
मीडिया आउटलेट ‘ड्रॉप साइट’ की एक सनसनीखेज रिपोर्ट में चार वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से यह बड़ा दावा किया गया है कि यूएई यमन के अंसारल्लाह यानी हूती विद्रोहियों को सऊदी अरब पर सटीक हमले करने के लिए खुफिया और रणनीतिक जानकारियां मुहैया करा रहा है। यह रिपोर्ट इसलिए भी हैरान करती है क्योंकि वैचारिक रूप से यूएई और ईरान समर्थित हूती विद्रोही एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन रहे हैं और अतीत में हूतियों ने यूएई पर कई घातक हमले भी किए हैं।
खूनी संघर्ष के पीछे क्या है मकसद
दरअसल इस पूरे खेल के पीछे यमन में यूएई और सऊदी अरब के आपस में टकराते हित हैं। यूएई दक्षिणी ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) नाम के अलगाववादी गुट का समर्थन करता है और मुकल्ला जैसे रणनीतिक बंदरगाहों पर अपना दबदबा बनाए रखना चाहता है जिससे समुद्री सप्लाई चेन पर उसका कंट्रोल रहे। दूसरी तरफ सऊदी अरब यमन की आधिकारिक सरकार का समर्थक है और यूएई के इस बढ़ते प्रभाव को अपनी दक्षिणी सीमा और लाल सागर की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा मानता है।
दोनों देशों के बीच यह तनाव पिछले साल दिसंबर में तब खुलकर दुनिया के सामने आ गया था जब सऊदी अरब ने मुकल्ला बंदरगाह पर भीषण हमला कर STC को भेजी जा रही हथियारों की खेप को नष्ट कर दिया था।
इस देश में LPG सिलेंडर की कीमत 8,200 रुपये पहुंची, जानें भारत में क्या हैं आज के रेट
इसके बाद सऊदी के दबाव में यूएई को यमन के कई इलाकों से पीछे हटना पड़ा था। ‘ड्रॉप साइट’ के सूत्रों के मुताबिक इसी खुन्नस में अब यूएई से जुड़े यमनी कमांडरों ने राजधानी सना में हूतियों के साथ सीधा अंदरूनी संपर्क बना लिया है और सऊदी अरब को मात देने के लिए उन्हें अंदरखाने खुफिया मदद दे रहे हैं। मिडिल ईस्ट की इस नई और जटिल बिसात ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कूटनीति में कोई भी स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता।



