जेल से रिहा होते ही आजम खान ने हिला दिया सियासी माहौल, जानें सारी बात

जानिए कैसे सपा नेता की रिहाई के बाद यूपी की सियासत में बढ़ रही हलचल, सपा और बसपा में संभावित बदलाव।

समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान की जेल से रिहाई के बाद सियासी हलचल एकाएक बढ़ गई है। जेल के बाहर उन्हें बधाई देने एवं जश्न मनाने के लिए समर्थकों की भीड़ उमड़ पड़ी। उनके प्रति सपा की सहानुभूति और प्यार भी उमड़ आया है। अखिलेश यादव का यह बयान कि आज खुशी का दिन है, इस बात के स्पष्ट संकेत हैं कि सपा को खान की अभी जरूरत है।

अखिलेश यादव का बयान और सपा की प्रतिक्रिया

अखिलेश ने यूपी सरकार पर आजम को फर्जी मामलों में फंसाने का न सिर्फ आरोप मढ़ा बल्कि यह भी कहा कि सपा सरकार आने पर सभी मामले वापस ले लिए जाएंगे। सपा के संस्थापक सदस्य खान पर सौ से अधिक केस दर्ज हैं। यूपी में भाजपा सरकार आने के बाद से उनके बुरे दिन शुरू हो गए थे। पिछले 23 माह से वह जेल में थे। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने उत्साहित समर्थकों का आभार व्यक्त कर ऐसा कोई बयान नहीं दिया, जिससे अटकलों का बाजार गर्म हो।

सपा नेता के बसपा में जाने की चर्चाएं

दरअसल इन दिनों खान के बसपा में जाने की चर्चाएं जोरों पर चल रही हैं। कहा जाता है कि वह जल्द सपा को छोड़ने और बसपा को ज्वाइन करने की घोषणा कर सकते हैं। हालांकि इस सवाल के जवाब पर आजम ने सिर्फ इतना कहा है कि इस बारे में वही बताएंगे जो अटकलें लगा रहे हैं। इसके इतर यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि खान चाहें सपा में रहें या बसपा में जाएं, 2027 में इन दोनों दलों में हार के कारण मातम छाना तय है।

भाजपा ने यह बयान भी दिया है कि आजम को न भाजपा ने जेल भिजवाया था, ना छुड़वाया है। सियासी गलियारों में चर्चाएं हैं कि भाजपा के दबाव के कारण आजम जल्द बसपा में जाने की तैयारी में हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक दौर वह था जब सपा में खान और बसपा में नसीमुद्दीन सिद्दीकी के नाम का सिक्का चला करता था।

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सपा सरकार में आजम और बसपा सरकार में नसीमुद्दीन का जलवा देखने लायक था। इन दोनों नेताओं की मुस्लिम मतदाताओं पर अच्छी पकड़ थी। समय बदला और आजम व नसीमुद्दीन अर्श से फर्श पर पहुंच गए। आजम जहां कानूनी पचड़ों में उलझते चले गए, वहीं नसीमुद्दीन ने बसपा का साथ छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया। वर्तमान में यह दोनों मुस्लिम नेता पहले की भांति राजनीति में सक्रिय दिखाई नहीं देते हैं।

क्या खान वाकई बसपा में जाकर नई राजनीतिक पारी आरंभ कर सकते हैं? क्या वह अखिलेश यादव से नाराज चल रहे हैं? यह सवाल इसलिए उठ रहे हैं चूंकि आजम के समर्थक समय-समय पर सपा मुखिया की आलोचना करते रहे हैं। समर्थकों का मानना रहा है कि आजम को सबसे बुरे दौर का सामना करना पड़ रहा है, मगर सपा और अखिलेश यादव खुलकर उनके साथ खड़े नहीं हो सके।

रामपुर में खान की सियासी स्थिति

रामपुर को दिग्गज मुस्लिम सपा नेता का सियासी गढ़ माना जाता था। वर्तमान में अपने गढ़ में वह अकेले पड़ चुके हैं। रामपुर की जनता ने भी उनसे किनारा कर लिया है। राजनीति में मुस्लिम नेता का अगला स्टैंड क्या होगा, यह वही जानते हैं, मगर जब तक वह पुन: सक्रिय राजनीति में नहीं आते तब तक अटकलें लगती रहेंगी। इन अटकलों पर विराम तभी लगेगा, जब खान खुद आगे आकर स्थिति को स्पष्ट करेंगे।

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