जयंत की आंख फोड़कर शुरू हुई प्रसिद्ध युद्ध लीला

जसवंतनगर,इटावा। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त नगर की 167वीं ऐतिहासिक मैदानी रामलीला में जयंत प्रसंग और विराध वध की लीला का प्रभावशाली मंचन किया गया। जयंत की आंख फोड़ने के प्रसंग के साथ ही रामलीला की प्रसिद्ध युद्ध लीला का शुभारंभ हो गया। मंचन देखने के लिए मैदान में बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे।

रामलीला में दिखाया गया कि भगवान राम चित्रकूट के समीप स्फटिक शिला पर माता सीता का श्रृंगार कर रहे थे। इसी दौरान इंद्र का पुत्र जयंत कौवे का रूप धारण कर वहां पहुंचा और माता सीता को बार-बार चोंच मारकर परेशान करने लगा। राम ने उसे रोकने का प्रयास किया, लेकिन वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। इस पर भगवान राम ने बाण चला दिया।

राम का बाण पीछे लगने पर जयंत अपने पिता इंद्र के पास पहुंचा और रक्षा की गुहार लगाई। इंद्र ने उसे सहायता देने से मना कर दिया। इसके बाद जयंत ब्रह्मा और भगवान शिव समेत अन्य देवताओं के पास गया, लेकिन किसी ने भी उसे राम के बाण से बचाने का साहस नहीं किया।

अंत में जयंत की मुलाकात नारद मुनि से हुई। नारद ने उसे भगवान राम की शरण में जाकर क्षमा मांगने की सलाह दी। जयंत वापस राम के पास पहुंचा और अपने अपराध के लिए क्षमा याचना की। भगवान राम ने उसकी एक आंख फोड़कर प्राण बख्श दिए।

इसके बाद विराध राक्षस वध का मंचन हुआ। वन में विचरण कर रहे भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता पर विराध ने हमला कर दिया। राम ने युद्ध करते हुए राक्षस का वध कर दिया। दोनों प्रसंगों के मंचन को दर्शकों ने उत्साह के साथ देखा।

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