आंसू गैस के एक गोले से शरीर में मच जाती है तबाही, जानें कैसे मिनटों में डैमेज हो जाते हैं ये अंग

tear gas effects: भीड़ नियंत्रण के दौरान दागे जाने वाले आंसू गैस के गोले आंखों, सांस और त्वचा को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। जानिए टियर गैस के संपर्क में आने पर शरीर में क्या बदलाव होते हैं, किन मरीजों को सबसे ज्यादा खतरा है और फौरन राहत के लिए क्या प्राथमिक उपचार अपनाना चाहिए।
टियर गैस शरीर को ऐसे पहुंचाता है नुकसान
टियर गैस के संपर्क में आते ही सबसे पहला और तीव्र असर आंखों पर नजर आता है। कॉर्निया और कंजंक्टिवा में तेज जलन के साथ अत्यधिक पानी बहने लगता है और आंखें पूरी तरह लाल हो जाती हैं।
जलन इतनी असहनीय होती है कि पलकें अपने आप बंद होने लगती हैं और पीड़ित को कुछ समय के लिए धुंधला दिखाई देने लगता है। ऐसी स्थिति में आंखों को हाथ से रगड़ना सबसे खतरनाक होता है क्योंकि इससे रासायनिक कण पुतलियों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
श्वसन तंत्र पर सीधा वार और अस्थमा मरीजों के लिए चेतावनी
सांस के जरिए टियर गैस के कण फेफड़ों तक पहुंचते ही नाक और गले में तीव्र चुभन पैदा करते हैं। इसके चलते अचानक तेज खांसी, सीने में भारी जकड़न, घुटन और सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज (व्हीजिंग) आने लगती है।
नाक से निरंतर पानी बहना, गले में सूजन, निगलने में तेज दर्द और मुंह में अत्यधिक लार बनना इसके आम लक्षण हैं। जिन लोगों को पहले से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या फेफड़ों की पुरानी बीमारी है, उनके लिए यह गैस घातक हो सकती है क्योंकि यह तुरंत गंभीर रेस्पिरेटरी अटैक को ट्रिगर कर देती है।
त्वचा पर केमिकल बर्न, खुजली और मतली की समस्या
त्वचा पर आंसू गैस के बारीक कण चिपकते ही तेज चुभन, लाल दाने और असहनीय खुजली शुरू हो जाती है। शरीर पर पसीना या नमी होने की स्थिति में यह रासायनिक प्रतिक्रिया और भी तेज हो जाती है, जिससे त्वचा केमिकल बर्न की तरह बुरी तरह झुलस सकती है। इसके अलावा, गैस की अत्यधिक सघनता के कारण कई लोगों को चक्कर आना, तेज जी मिचलाना और निरंतर उल्टी होने जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है।
बंद स्थानों में फेफड़ों को स्थायी नुकसान का भारी जोखिम
खुले मैदानों की तुलना में यदि आंसू गैस का इस्तेमाल किसी संकरी गली, चारदीवारी या बंद कमरे में हो, तो इसका खतरा कई गुना बढ़ जाता है। हवा की कमी और गैस के भारी जमाव के कारण सांस के साथ भारी मात्रा में टॉक्सिक एजेंट फेफड़ों के आंतरिक टिश्यूज को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसी स्थिति में ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिरता है, जिससे फेफड़ों में पानी भरने (पल्मोनरी एडिमा) का गंभीर जोखिम बन जाता है, इसलिए ऐसे स्थान से तुरंत बाहर निकलना ही जीवन रक्षा का पहला नियम है।
संपर्क में आने पर फौरन अपनाएं ये प्राथमिक उपचार
आंसू गैस के असर से बचने के लिए सबसे पहले उस क्षेत्र से हटकर तुरंत खुली और ताजी हवा में जाएं। चेहरे और आंखों को हाथों से बिल्कुल न रगड़ें। यदि आंखों में जलन हो रही है तो बिना रुके 10 से 15 मिनट तक निरंतर साफ और ठंडे पानी की धार से आंखों को धोएं। यदि आंखों में कॉन्टैक्ट लेंस लगे हैं, तो उन्हें तुरंत निकाल कर फेंक दें और दोबारा कभी इस्तेमाल न करें। त्वचा पर लगे केमिकल को हटाने के लिए साधारण पानी और साबुन से अच्छी तरह नहाएं या प्रभावित हिस्से को धो लें।
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किन गंभीर लक्षणों पर तुरंत पहुंचे डॉक्टर के पास
आमतौर पर खुली हवा में जाने के बाद जलन कम हो जाती है, मगर केवल यह सोचकर लापरवाही न बरतें कि सब कुछ अपने आप ठीक हो जाएगा। यदि गैस के दायरे से बाहर निकलने के काफी समय बाद भी सांस लेने में भारी दिक्कत बनी रहे, सीने में जकड़न कम न हो, निरंतर तेज खांसी के दौरे पड़ रहे हों अथवा आंखों का दर्द व धुंधलापन दूर न हो रहा हो, तो बिना समय गंवाए नजदीकी अस्पताल में आपातकालीन चिकित्सा सहायता (ईआर) लेनी चाहिए।



