कागजों में अव्वल, हकीकत में बदहाल: गाजियाबाद के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर कहीं ताला तो कहीं बिना मास्क इलाज
291 में से कई केंद्रों की व्यवस्था रामभरोसे, पड़ताल में पांच स्वास्थ्य केंद्र बंद मिले; बिजली-पानी और साफ-सफाई की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में

गाजियाबाद। लोगों को घर के पास बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की जमीनी हकीकत सरकारी दावों से अलग नजर आ रही है। जिले में संचालित 291 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में से कई केंद्रों पर स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हैं। मंगलवार को सुबह 10 से दोपहर 12 बजे के बीच की गई पड़ताल में कई केंद्रों पर ताले लटके मिले, जबकि कुछ केंद्र खुले होने के बावजूद व्यवस्थाएं संतोषजनक नहीं मिलीं।
पड़ताल के दौरान जलालाबाद, सीकरी कलां, जावली लोनी, शकलपुरा लोनी और कोतवालपुर लोनी स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर बंद मिले। वहीं सिरौरा लोनी का केंद्र खुला था, लेकिन वहां मरीज नहीं मिले।
बिना मास्क और एप्रिन के मरीज देखते मिले स्वास्थ्यकर्मी
नाहल, कुशलिया, दीनानाथपुर पूठी, रघुनाथपुर, नगरीय हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर लाजपत नगर, बाल्मीकि कुंज और विजयनगर के केंद्र खुले मिले। हालांकि, स्वाइन फ्लू को लेकर एडवाइजरी और दिशा-निर्देश जारी होने के बावजूद कुछ केंद्रों पर चिकित्सक और सीएचओ बिना मास्क और एप्रिन के मरीजों का इलाज करते मिले।
कहीं देर से पहुंचे चिकित्सक, कहीं मूलभूत सुविधाओं का अभाव
पड़ताल में सामने आया कि कुछ केंद्रों पर ओपीडी सुबह नौ बजे से शुरू होने का समय निर्धारित है, लेकिन चिकित्सक और सीएचओ दोपहर करीब 12 बजे तक पहुंचे। कई केंद्रों पर बिजली, पानी, साफ-सफाई और जांच की सुविधाएं भी संतोषजनक नहीं मिलीं।
इसके अलावा अधिकांश सीएचओ द्वारा इन दिनों एएमएस सिस्टम पर नियमित हाजिरी दर्ज नहीं करने की बात भी सामने आई है। पूर्व में घर बैठे हाजिरी लगाने का मामला भी सामने आ चुका है।
रैंकिंग में प्रदेश में अव्वल, व्यवस्थाओं पर सवाल
खास बात यह है कि हाल ही में प्रदेश स्तर पर जारी रैंकिंग में गाजियाबाद के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को पहली रैंकिंग मिली है। ऐसे में जमीनी स्तर पर कई केंद्रों के बंद मिलने और व्यवस्थाओं में खामियां सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।



