भारत के इस गांव में गधों की शादी का आयोजन; वजह भी है बहुत खास

donkey wedding in india: बारिश न होने की वजह से सूख रही अपनी फसलों को बचाने के लिए किसानों ने एक अनोखा तरीका अपनाया है। आंध्र प्रदेश से एक अनोखी घटना सामने आई है, जहाँ ग्रामीणों ने बारिश के देवता (वरुण राजा) को खुश करने के लिए दो गधों की शादी करवाई। इस समारोह में इंसानों की शादी में होने वाली सभी रस्में बड़े उत्साह के साथ निभाई गईं। यह अनोखी शादी अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई है।
बारिश का इंतज़ार और एक अनोखी परंपरा
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना इलाकों में मॉनसून आए हुए दो महीने हो चुके हैं, लेकिन कम बारिश की वजह से कई इलाकों में सूखे का खतरा बना हुआ है। बारिश का इंतज़ार करते-करते और अल-नीनो (El Niño) के असर से जूझते हुए किसानों को सिर्फ़ निराशा ही हाथ लगी है। इसलिए, पाल्थुर गाँव (विडापनाकल्लु मंडल, अनंतपुर ज़िला) के किसानों ने बारिश के देवता से गुहार लगाने के लिए एक पुरानी और अनोखी परंपरा का सहारा लिया। ग्रामीणों ने खूब बारिश होने और अपनी फसलों को बचाने की उम्मीद में गधों की शादी का आयोजन किया।
शाही शादी जैसी ज़बरदस्त तैयारी!
यह अनोखी शादी पाल्थुर के मशहूर शंकरेश्वर स्वामी मंदिर परिसर में आयोजित की गई थी। समारोह के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी गई; गधों को फूलों की सुंदर मालाओं से सजाया गया और हल्दी-केसर मिले पानी से नहलाया गया।
इंसानों की शादी जैसी रस्में- जैसे माला बदलना, पवित्र चावल के दाने (अक्षत) डालना और मंगलसूत्र बांधना—सभी निभाई गईं। खास बात यह है कि शादी के बाद, अनोखे दूल्हा-दुल्हन को ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक संगीत के साथ पूरे गाँव में घुमाया गया। ग्रामीणों ने पूरी श्रद्धा के साथ इन बेज़ुबान जानवरों से आशीर्वाद मांगा। समारोह के बाद, सभी ग्रामीणों के लिए सामूहिक भोज (महाप्रसाद) का आयोजन किया गया।
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ग्रामीणों को इस पुरानी मान्यता पर गहरा विश्वास है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जब भी गाँव में भयंकर सूखा पड़ता है, तो यह परंपरा निभाई जाती है। ग्रामीणों का पीढ़ियों से यह मानना है कि गधों की शादी कराने और सच्ची श्रद्धा से उनकी पूजा करने से बारिश के देवता भगवान वरुण खुश होते हैं और बारिश होती है। प्रकृति की मार से बेबस किसानों की यह अनोखी कोशिश आजकल सोशल मीडिया और हर जगह चर्चा का विषय बनी हुई है।



