अखिलेश का नया ‘पंडित’ दांव: PDA के जरिए ब्राह्मण वोट बैंक साधने की तैयारी, 100 सीटों पर टिकी सपा की नजर

up politics brahmin voter: उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में इन दिनों जातिगत समीकरणों को लेकर जबरदस्त हलचल मची हुई है। पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक राजनीति के बीच अब फोकस ब्राह्मण मतदाताओं को अपने पाले में लाने पर टिक गया है।
विपक्ष लगातार यह नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रहा है कि सत्ता पक्ष की कार्यशैली और कथित ‘ठाकुरवाद’ से ब्राह्मण समाज असहज है। इस सियासी मौके को भुनाने की रेस में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव सबसे आगे दिखाई दे रहे हैं। सम्मेलनों से लेकर बयानों तक, सपा मुखिया इन दिनों ब्राह्मण समाज से जुड़े मुद्दों को जोर-शोर से उठा रहे हैं।
PDA की नई परिभाषा: ‘पी’ से पिछड़ा ही नहीं, अब ‘पंडित’ भी
अखिलेश यादव ने हाल ही में अपने बहुचर्चित ‘पीडीए’ फॉर्मूले को एक नया मोड़ देते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने विरोधियों पर तंज कसते हुए कहा कि चुनाव हारने वाले लोग पीडीए की मनगढ़ंत व्याख्या करते हैं, जबकि पीडीए में ‘पीडी’ का वास्तविक मतलब पंडित (ब्राह्मण) से भी जुड़ा हुआ है। अखिलेश का कहना है कि सरकार जितनी अधिक पीड़ा बढ़ाएगी, पीडीए का सामाजिक गठबंधन उतना ही ज्यादा मजबूत होकर उभरेगा।
खुशी दुबे और बिकरू कांड के बहाने भावनात्मक अपील
सपा मुखिया ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कानपुर के चर्चित बिकरू कांड के सह-आरोपी अमर दुबे की पत्नी खुशी दुबे के मामले को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सवाल किया कि किस तरह एक नवविवाहिता को जेल की सलाखों के पीछे भेजा गया, जिसे जनता आज भी नहीं भूली है। 8 जुलाई 2020 को अमर दुबे के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद सपा ने खुशी दुबे के परिवार की लगातार आर्थिक मदद की है। अमर दुबे की मां गायत्री देवी के गंभीर रूप से बीमार होने पर उनके इलाज का पूरा खर्च भी समाजवादी पार्टी ने उठाया था।
UP Politics: अखिलेश के बयान पर जयंत और मायावती आमने-सामने, चुनाव से पहले बढ़ा सियासी तापमान
जनेश्वर मिश्र पार्क में ब्राह्मण सम्मेलन और 100 सीटों पर नजर
लखनऊ स्थित जनेश्वर मिश्र पार्क में आयोजित ब्राह्मण सम्मेलन में शामिल होकर अखिलेश यादव ने सीधे तौर पर इस वर्ग से संवाद साधा। उन्होंने विकास दुबे कांड की ओर इशारा करते हुए तीखा हमला बोला और कहा कि उत्तर प्रदेश में ‘गाड़ी पलटाने वालों’ को इस बार सूबे का ब्राह्मण समाज सत्ता से पलट देगा। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, उत्तर प्रदेश की करीब 100 ऐसी विधानसभा सीटें हैं जहां ब्राह्मण मतदाता सीधे तौर पर हार-जीत तय करते हैं। यही वजह है कि सपा अब इस पारंपरिक कोर वोट बैंक में सेंधमारी कर 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले एक नया सामाजिक संतुलन तैयार करने में जुटी है।



