पहली ही बारिश में खुली नगर पंचायत की पोल, जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त

महराजगंज, रायबरेली। वैसे तो काग़जों पर धड़ल्ले से हो रहा है नगर पंचायत का विकास। किंतु जमीनी हकीकत देखनी हो तो गुरुवार को हुई बरसात के बाद अस्पताल रोड गांधी नगर आर्य नगर बछरांवा तिराहा आदि स्थान के जलभराव ने नगर पंचायत की हकीकत बयां करने के लिए पर्याप्त प्रमाण है। बारिश के बाद नगर के कई हिस्सों में जलभराव हो गया, जिससे आम जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया। अस्पताल जाने वाला मुख्य मार्ग पूरी तरह पानी में डूबा रहा, जबकि गांधी नगर मोहल्ले में जलभराव से राहत दिलाने के लिए पंप सेट लगाकर पानी निकाला गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शासन द्वारा नगर के विकास और नागरिकों के बेहतर जीवन स्तर के लिए करोड़ों रुपये उपलब्ध कराए जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और नगर पंचायत अधिकारियों की लापरवाही तथा बिना समुचित कार्ययोजना के विकास कार्य कराने के नाम पर सिर्फ दिखावा है। क्योंकि समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं।
नागरिकों का आरोप है कि जिन क्षेत्रों में पहले से पक्की सड़क और नालियां बनी हुई हैं, वहीं दोबारा निर्माण कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है, जबकि जिन मोहल्लों में मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं, वहां वर्षों से कोई कार्य नहीं कराया गया।
आर्य नगर स्थित दानेश्वर मंदिर के पीछे रहने वाले जगमोहन ने बताया कि गुरुवार सुबह हुई बारिश के बाद उनके मोहल्ले के चार से छह घरों में पानी भर गया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में न तो जल निकासी की व्यवस्था है और न ही सड़क का निर्माण कराया गया है। पिछले पांच वर्षों में मोहल्लेवासियों ने सड़क और नाली निर्माण के लिए नगर पंचायत को दर्जनों शिकायत पत्र दिए, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
वहीं, स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि राजा स्कूल जाने वाले मार्ग पर पहले से सीसी सड़क सही स्थिति में होने के बावजूद लगभग 40 लाख रुपये की लागत से दोबारा निर्माण कराया जा रहा है जब की आर्यनगर में घेरा पुलिया से लेकर पूरे सुखई तक पास सीसी रोड का कार्य अभी तक नहीं शुरू किया गया। जब की जानकारों के हिसाब सेइसका पैसा भी शासन से निर्गत हो चुका है।
विकास के दावों पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि चुनाव के समय नगर को हजरतगंज जैसा विकसित बनाने का दावा करने वाले जनप्रतिनिधि अब जलभराव जैसी गंभीर समस्याओं से मुंह मोड़े हुए हैं। लोगों का आरोप है कि वोट मांगने के दौरान घर-घर पहुंचने वाले जनप्रतिनिधि आज जलभराव से परेशान नागरिकों का हाल जानने तक नहीं आ रहे हैं और केवल सोशल मीडिया पर विकास के दावे करते नजर आते हैं। जिसे लेकर लोगों में आक्रोश और असंतोष लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।



