सीधे एयरपोर्ट से फांसी के फंदे तक, बांग्लादेशी नेता ने शेख हसीना की वापसी को लेकर बेहद भड़काऊ धमकी दी

Sheikh Hasina Return Bangladesh: बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर तनाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। अगस्त 2024 में सत्ता गंवाने के बाद भारत में शरण लेने वालीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस साल दिसंबर तक अपने देश लौटने की इच्छा जताई है। उनके इस बयान पर बांग्लादेश के राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया हुई है।
खास तौर पर छात्र आंदोलन के नेता, नेशनल सिटिज़न पार्टी के अहम सदस्य और संसद में विपक्ष के चीफ व्हिप नाहिद इस्लाम ने उनकी वापसी को लेकर कड़ा रुख अपनाया है और सीधे तौर पर धमकी दी है कि उन्हें मार डाला जाएगा या फांसी दे दी जाएगी।
नाहिद इस्लाम ने क्या कहा?
3 अगस्त को ढाका में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए नाहिद इस्लाम ने आक्रामक लहजे में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “अगर प्रधानमंत्री तारिक रहमान दिल्ली के साथ किसी राजनीतिक समझौते के ज़रिए शेख हसीना को वापस भी ले आते हैं, तो भी देश की जनता और ‘जुलाई आंदोलन’ में शहीद हुए लोगों के परिवार चुप नहीं बैठेंगे। जब तक शेख हसीना को फांसी नहीं दी जाती, जनता सड़कों पर उतरेगी; उन्हें सीधे एयरपोर्ट से फांसी के फंदे तक ले जाया जाएगा।”
नाहिद इस्लाम ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके जन-आंदोलन का मकसद किसी खास नेता को सत्ता में लाना नहीं था, बल्कि देश की तानाशाही व्यवस्था, भ्रष्टाचार और मनमाने शासन को हमेशा के लिए खत्म करना था।
सरकार की आलोचना
नाहिद इस्लाम ने न केवल शेख हसीना बल्कि मौजूदा सरकार की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता परिवर्तन के महीनों बाद भी देश के हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है। रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार और बिजली व गैस की कमी जैसे मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं। उन्होंने इस बात पर भी निराशा जताई कि सरकार ने आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले शहीदों के परिवारों और घायल हुए लोगों की मदद के लिए अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं।
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अगस्त 2024 में सरकार का तख्तापलट
गौरतलब है कि अगस्त 2024 में बांग्लादेश में छात्रों के नेतृत्व में एक अभूतपूर्व और हिंसक आंदोलन शुरू हुआ था। इस विद्रोह के कारण शेख हसीना का 15 साल पुराना शासन कुछ ही दिनों में ढह गया। प्रदर्शनकारियों ने उनके आधिकारिक आवास पर भी हमला किया; इसके बाद, सुरक्षा चिंताओं के चलते शेख हसीना हेलीकॉप्टर से देश छोड़कर भाग गईं और भारत में शरण ली। अब, उनके वतन वापसी की संभावना पर हो रही चर्चाओं ने बांग्लादेश के राजनीतिक माहौल में फिर से हलचल पैदा कर दी है।



