सनातन धर्म में गुरु का बड़ा ही महत्व है: आचार्य मिश्रा

क्यों श्रेष्ठ है गुरु पूर्णिमा

भरथना,इटावा। आचार्य अमित मिश्रा (कानपुर) छोला मन्दिर भरथना ने गुरू पूर्णिमा के पावन पर्व के उपलक्ष्य में कहा कि हमारे सनातन धर्म में गुरु का बड़ा ही महत्व है। पुराण धर्मशास्त्र कहते हैं कि गुरु कोई शरीर या मनुष्य मात्र नहीं है। गुरु एक तत्व है, जो हर शिष्य के लिये एक नया अवतार होता है। गुरु वह श्रेष्ठ नाम है, जो ईश्वर से निकलने वाली ऊर्जा को मंत्र के माध्यम से शिष्य के हृदय में प्रवेश कराने का सामर्थ्य रखता है। गुरु को कभी भी संत, महापुरुष या शरीर नहीं मानना चाहिये।

आचार्य श्री मिश्रा ने कहा कि गुरु स्वयं भगवान का ही स्वरूप होता है (गुरू साक्षात परंब्रहम) का प्रतिबिम्ब है। गुरु वह है जो शिष्य का शोक हरने के बजाय शिष्य को अंधकारमय जीवन से निकालकर परमात्मा से जोड़ दे।

वही सच्चा गुरू कहलाने का अधिकारी होता है। गुरु यदि चाह ले, तो शिष्य का पतन कभी नहीं हो सकता, शिष्य को अपने गुरु के प्रति निष्ठा, विश्वास,श्रद्धा और समर्पण सदैव रखना चाहिए। जीवन में दिव्यता प्राप्त करने के लिये गुरु का होना अतिआवश्यक है। जैसे पिता-पुत्र की देखरेख करता है, वैसे ही गुरु शिष्य को गलत रास्ते पर जाने से रोकता है। इसलिए गुरु पूजा के लिये गुरु पूर्णिमा श्रेष्ठ है।

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