सरकार या कंपनी, जानें भारत में गैस सिलेंडर के दामों को तय करने वाला असली ‘मास्टरमाइंड’ कौन

LPG subsidy updates India: हर महीने की पहली तारीख की तरह आज यानी 1 जुलाई 2026 को भी देश में एलपीजी (LPG) सिलेंडर की नई कीमतें जारी कर दी गई हैं। इस बार सरकार और तेल कंपनियों ने कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में ₹183.50 की बड़ी कटौती करके व्यापार जगत को बड़ी राहत दी है। हालांकि, रसोई का बजट संभालने वाली आम जनता के लिए घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस कटौती के बाद एक बार फिर यह बहस छिड़ गई है कि आखिर घरों में इस्तेमाल होने वाला सिलेंडर इतना सस्ता और दुकानों-होटलों में बिकने वाला कमर्शियल सिलेंडर इतना महंगा क्यों होता है? आइए इसके पीछे के छिपे गणित को बेहद आसान शब्दों में समझते हैं।
विदेशी बाजार और डॉलर का खेल: ऐसे तय होता है एलपीजी का बेस प्राइस
क्या आप जानते हैं कि भारत अपनी जरूरत की लगभग 50% एलपीजी गैस दूसरे देशों से आयात (Import) करता है? हमारे देश में एलपीजी की शुरुआती कीमत ‘इंपोर्ट पैरिटी प्राइस’ (IPP) के फॉर्मूले से तय होती है, जो मुख्य रूप से सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी ‘सऊदी अरामको’ की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर निर्भर करती है।
चूंकि वैश्विक बाजार में गैस की खरीदारी डॉलर में होती है, इसलिए इसमें समुद्री जहाज का भारी-भरकम किराया, इंश्योरेंस, कस्टम ड्यूटी और पोर्ट चार्ज जैसी लागतें जुड़ती जाती हैं। इसके चलते भारतीय रुपये के मुकाबले डॉलर की मजबूती या कमजोरी भी सीधे आपके सिलेंडर की कीमत तय करती है।
विदेशी गैस आपके घर तक कैसे पहुंचती है?
जब कच्ची गैस विदेशों से भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचती है, तो देश की सरकारी तेल कंपनियां (जैसे IOCL, BPCL, HPCL) इसे अपने हाथ में लेती हैं। इसके बाद शुरू होता है घरेलू खर्चों का सिलसिला।
सिर्फ 5 दिन का तेल भंडार! युद्ध या सप्लाई संकट आया तो भारत के सामने खड़ी हो सकती है बड़ी चुनौती
इसमें देश के भीतर का ट्रांसपोर्टेशन खर्च, रीफिलिंग प्लांट में गैस को सिलेंडरों में भरने की लागत, कंपनियों का अपना मार्केटिंग खर्च और अंत में आपके घर तक सिलेंडर पहुंचाने वाले गैस एजेंसी डीलरों का कमीशन जोड़ा जाता है। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों और शहरों में स्थानीय टैक्स व ढुलाई खर्च भिन्न होने के कारण एक ही सिलेंडर की कीमत देश के कोने-कोने में अलग-अलग होती है।



