US-ईरान संघर्ष के कारण डीज़ल की कीमतें 81% बढ़ीं; इन देशों पर पड़ा सबसे ज़्यादा असर

Diesel Price Hike 81 Percent: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे टकराव के कारण वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँच गई हैं, और ईंधन संकट ने एक गंभीर रूप ले लिया है। इस टकराव का सबसे ज़्यादा असर डीज़ल की कीमतों पर पड़ा है; कुछ देशों में इसकी दरें तेज़ी से बढ़कर 81 प्रतिशत तक पहुँच गई हैं। इसके परिणामस्वरूप, वैश्विक मुद्रास्फीति (महंगाई) का एक बड़ा खतरा सामने आ गया है।

पूरी दुनिया में डीज़ल की कीमतों में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी फिलीपींस में देखी गई है, जहाँ कीमतें 81.6% तक बढ़ गई हैं। इसके बाद नाइजीरिया (78.3%), मलेशिया (57.9%) और सिंगापुर (44%) का नंबर आता है, जहाँ कीमतों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विकसित देशों को भी इसकी मार झेलनी पड़ी है; अमेरिका में डीज़ल की कीमतें 41.2% और जर्मनी में 30.9% तक बढ़ गई हैं। कच्चे तेल की कीमतें अब बढ़कर $116 प्रति बैरल तक पहुँच गई हैं।

भारत की स्थिति क्या है?

जहाँ दुनिया भर के कई देशों में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं भारत अब तक अपने खुदरा ईंधन दरों को नियंत्रण में रखने में सफल रहा है। रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति और सरकार की रणनीतिक नीतियों की बदौलत, भारत डीज़ल की कीमतों में भारी उछाल से बचने में कामयाब रहा है। हालाँकि, ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि औद्योगिक डीज़ल की कीमत में ₹22 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

होरमुज़ ने बिगाड़ दिया खेल

ईरान द्वारा होरमुज़ जलडमरूमध्य की नाकेबंदी ने वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर दिया है। कच्चे तेल की कीमतें पहले ही $100 प्रति बैरल के आँकड़े को पार कर चुकी हैं, और विशेषज्ञों का मानना ​​है कि यदि यह टकराव जारी रहा, तो कीमतें बढ़कर $150 प्रति बैरल तक पहुँच सकती हैं। ब्लैकरॉक के CEO ने एक कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि ऐसा हुआ, तो दुनिया को एक गंभीर आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ सकता है।

अगर ऐसा हुआ तो दुबई और अबू धाबी हो जाएंगे तबाह, ईरान युद्ध पर अमेरिकी अर्थशास्त्री

ईंधन की कीमतों पर युद्ध का प्रभाव

यह टकराव 28 फरवरी को तब शुरू हुआ, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर शुरुआती हमले किए। ईरान ने मिसाइल हमलों के साथ इसका करारा जवाब दिया। होरमुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने और तेल टैंकरों पर हमलों के कारण इस युद्ध ने आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर दिया है। चूँकि कच्चे तेल को रिफाइन करने की प्रक्रिया अब ज़्यादा महँगी हो गई है, इसलिए पेट्रोल और विशेष रूप से डीज़ल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है।

Related Articles

Back to top button