ये इस्लामिक कंट्री देती है गैस तो बनता है आपके घर पर खाना!

LPG GAS Crisis 2026: देश के बड़े शहरों में रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर हालात थोड़े कठिन दिख रहे हैं। कई लोग गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों में खड़े हैं और कुछ स्थानों पर चिंता की लहर भी देखने को मिल रही है। आम नागरिकों के लिए यह समय असहज है क्योंकि रसोई गैस उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ी है।

एलपीजी की आपूर्ति भारत की तैयारी क्या

मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बदल रहे हैं और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अफर तफरी बढ़ रही है। इन परिस्थितियों को देखते हुए भारत सरकार ने एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम तेज कर दिए हैं। सरकार ने तेल और गैस कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि घरेलू उत्पादन बढ़ाया जाए और देश के संसाधनों का पूरा इस्तेमाल किया जाए।

सूत्रों के अनुसार, ‘प्लान बी’ के तहत भारत पहले से ही संभावित संकट के लिए तैयारी में जुटा है। इसका मकसद यह है कि अगर अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति में कोई रुकावट आए या कीमतें अचानक बढ़ जाएं, तो घरेलू मांग आसानी से पूरी की जा सके।

प्लान बी पर एक नजर

प्लान बी में सबसे अहम कदम है देश में एलपीजी का उत्पादन बढ़ाना। इसके साथ ही भारत ने विदेशों से गैस शिपमेंट्स की प्रक्रिया भी तेज कर दी है। ऑस्ट्रेलिया और कनाडा से बड़ी मात्रा में एलपीजी भारत पहुंच रही है, ताकि स्टॉक हमेशा पर्याप्त रहे और आम जनता को किसी प्रकार की कमी महसूस न हो।

भारत अपनी एलपीजी जरूरत का अधिकांश हिस्सा विदेशों से आयात करता है। मुख्य स्रोतों में क़तर 42.22%, अमेरिका 18.5%, यूएई 11.11%, अंगोला 7.07% और नाइजीरिया 5.1% शामिल हैं। शेष लगभग 15% गैस अन्य देशों से आती है।

इन मुस्लिम देशों से भारत आती है गैस

एलपीजी आयात में खाड़ी देशों की हिस्सेदारी महत्वपूर्ण है। यूएई और क़तर मिलकर 62% से अधिक गैस सप्लाई करते हैं। इसके बाद सऊदी अरब 18.2% और कुवैत 15.6% योगदान देता है। अमेरिका 2026 तक रणनीतिक साझेदार के रूप में लगभग 10% आपूर्ति करेगा।

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विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात में यह रणनीति देश के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। साथ ही सरकार जमाखोरी और अफवाहों से पैदा होने वाली पैनिक स्थिति पर भी लगाम लगाने में जुटी है।

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