हर्ष फायरिंग के नाम पर ‘सरेआम कत्ल’, जानें क्यों हर साल वैवाहिक सीजन में सैकड़ों बेगुनाह होते हैं शिकार

कुछ पलों की खुशी के लिए दूसरों के जीवन को संकट में डालना कतई समझदारी नहीं है। दौलत और ताकत का नशा अक्सर बर्बादी की राह पर ले जाता है। इसके बावजूद बिगड़ैल मिजाज के कुछ व्यक्ति बाज नहीं आते हैं। अब देखिए ना हर्ष फायरिंग गैरकानूनी होने के बावजूद रुक नहीं पाई है। प्रतिवर्ष वैवाहिक सीजन में यह समस्या और गंभीर होने लगती है। इसका खामियाजा उन व्यक्तियों को भुगतना पड़ता है, जिनका कोई दोष नहीं होता।
मेरठ में लिसाड़ी गेट के श्याम नगर में कुछ दिन पहले बारात में हर्ष फायरिंग के दरम्यान युवती अफशां को जान गंवानी पड़ी। घटना के वक्त अफशां छत पर खड़े होकर बारात देख रही थी। इसी प्रकार ग्रेटर नोएडा के नगला चमरू गांव में बारात में हर्ष फायरिंग की चपेट में आने से दस साल का हर्ष गंभीर रूप से घायल हो गया। बालक को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। यह दो हालिया घटनाएं हर्ष फायरिंग का उदाहरण मात्र हैं। देश में हर साल इस प्रकार की सैकड़ों घटनाएं सामने आती हैं।
भारत में गैरकानूनी फिर भी लोग करते हैं
हर्ष फायरिंग का मतलब किसी खुशी के अवसर पर अति-उत्साह में या दिखावे के लिए गोलीबारी करना है। भारत में ऐसा करना गैरकानूनी है। ऐसा करने पर दो साल की जेल या एक लाख तक का जुर्माना या दोनों संभव हैं। शादी, सगाई और जन्मदिन समारोह में आमतौर पर हर्ष फायरिंग करने का चलन देखने को मिलता है। वैवाहिक सीजन की शुरुआत के समय पुलिस विभाग आमतौर पर सख्त दिशा-निर्देश जारी करता है, मगर पुलिस के ऑर्डर की हर बार सरेआम धज्जियां उड़ जाती हैं। हर्ष फायरिंग के चलते कोई जानलेवा हादसा होने पर रंग में भंग पड़ने जैसी स्थिति पैदा हो जाती है।
सिर्फ कानून बनाने और प्रतिबंध लगाने से हर्ष फायरिंग पर रोक लग जाएगी, ऐसा कतई संभव नहीं है। यदि सजा या जुर्माने का डर होता तो कोई व्यक्ति ऐसा करने से पहले सौ बार सोचता। मसलन इसके लिए कुछ और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।
सबसे पहले नागरिकों को जागरूक होना पड़ेगा। उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि दूसरे की जिंदगी को दांव पर लगाकर असीम सुख की प्राप्ति संभव नहीं है। इसके अतिरिक्त पुलिस को कुछ और कदम उठाने चाहिए। इसके तहत प्रत्येक थानाक्षेत्र में कोई भी वैवाहिक समारोह होने पर वर एवं वधू पक्ष को हर्ष फायरिंग न हो, इस संदर्भ में सख्त हिदायत पहले से दी जानी चाहिए। हर्ष फायरिंग के अधिकांश मामले नशे की हालत में होते हैं।
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नशे में चूर व्यक्ति होश की बजाए जोश से काम लेता है। वह वैध या अवैध बंदूक या पिस्टल का इस्तेमाल कर फायरिंग करने लगता है। ऐसे में वर एवं वधू पक्ष की जिम्मेदारी बनती है कि वह इस प्रकार के व्यक्तियों पर न सिर्फ नजर रखें बल्कि उन्हें गैरकानूनी काम करने से भी रोकें। यदि ऐसा करना संभव न हो तो तत्काल पुलिस को सूचना दी जाए।
वहीं हर्ष फायरिंग के बाद फोटो एवं वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने का प्रचलन भी रुक नहीं पाया है। अलबत्ता इस समस्या के निदान के लिए समाज को भी आगे आना पड़ेगा। सभी वैवाहिक स्थलों पर इस बाबत प्रचार सामग्री चस्पा करनी चाहिए। साइन बोर्ड व इश्तहार चस्पा कर हर्ष फायरिंग से जुड़े कानून और सजा के विषय में नागरिकों को सचेत करने की आवश्यकता है।



