Afg India Relations 2025: भारत अफगानिस्तान बयान, POK भारत का हिस्सा; बेचैन हुआ पाक
Afg India Relations 2025: भारत-अफगानिस्तान के संबंधों में सुधार के नए अध्याय की शुरुआत से इतर अफगानिस्तान-पाकिस्तान के बीच टकराव बढ़ना चिंताजनक है। समूची दुनिया इन दोनों घटनाक्रम को बारीकी से देख रही है।
अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी इन दिनों भारत की यात्रा पर हैं। मुत्तकी की यह यात्रा पाकिस्तान को रास नहीं आ रही है।
भारत-अफगानिस्तान के संयुक्त बयान से पाक बैचैन (Indo‑Afghan relations 2025)
अमीर खान मुत्तकी और डॉ. एस जयशंकर की मुलाकात के बाद भारत-अफगानिस्तान के संयुक्त बयान ने पाकिस्तान को और ज्यादा बेचैन कर दिया है। संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा बताया गया है। ऐसे में पड़ोसी मुल्क का हाल बेहाल होना स्वाभाविक है। इस बीच एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अफगानिस्तान के साथ पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित करने की वकालत की है। उन्होंने तालिबान को भारत के लिए रणनीतिक क्षेत्र माना है।
अफगानी के मन में भारत के प्रति मान-सम्मान की भावना (India’s Afghanistan policy 2025)
वैसे Afg India के Relations हमेशा अच्छे रहे हैं। अतीत से जुड़ी कुछ कड़वी यादों को दरकिनार कर दिया जाए तो प्रत्येक आम अफगानी के मन में भारत के प्रति मान-सम्मान की भावना है। सोशल मीडिया पर हाल ही में वायरल एक वीडियो ने भारतीयों के प्रति अफगानों के सम्मान का नायाब उदाहरण देखने को मिला है। वीडियो में भारतीय राइडर को तालिबान की चेक पोस्ट पर रोक लिया जाता है।
राइडर द्वारा खुद को इंडियन बताए जाने पर चेक पोस्ट पर तैनात सुरक्षा जवान अचानक पीछे हट जाते हैं। वह बगैर जांच-पड़ताल के राइडर को आगे जाने की अनुमति प्रदान कर देते हैं। नीयत साफ और इरादे ने हों तो भविष्य में इसका मीठा फल मिलता जरूर है। अफगानिस्तान को लेकर भारत की नीति शुरू से सहयोग की रही है। हालात चाहे कैसे भी रहे, मगर नई दिल्ली ने अपना स्टैंड नहीं बदला।
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अफगानिस्तान के समुचित विकास तथा बुनियादी सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए भारत ने अग्रणी भूमिका निभाई है। प्रत्येक अफगानी जानता है कि भारत दुश्मन नहीं सच्चा दोस्त है। अफगानिस्तान में तालिबान सरकार की वापसी के दरम्यान पाकिस्तान में मानो दीपावली मनाई गई थी। पाकिस्तान की सेना और राजनेता बल्लियां उछलते नजर आए थे। उस समय भारत विरोधी बयानबाजी चरम पर थी।
ऐसा माहौल बनाया गया, मानो तालिबान के लड़ाके जम्मू-कश्मीर पर धावा बोलने को तैयार बैठे हैं, मगर जैसे-जैसे समय बदला, पाकिस्तान की उम्मीदों पर पानी फिरता चला गया। जिस तालिबान के भरोसे पाकिस्तान की साजिश भारत को अशांत करने की थी, वहीं अब उसके लिए सिरदर्द साबित हो रहा है। इसमें दो राय नहीं कि तालिबान सरकार के विदेश मंत्री के भारत दौरे से चिढ़कर ही पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर एयर स्ट्राइक करने का दुस्साहस किया है।
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Taliban ने भी जवाबी हमला कर इस्लामाबाद के होश उड़ा दिए हैं। दोनों देशों में तनाव का बढ़ना किसी के हित में नहीं है। यह दुनिया में नए संघर्ष की आहट के संकेत हैं। कहा जाता है कि संघर्ष छेड़ना अपने हाथ में होता है, मगर इसे रोकना काबू से बाहर हो जाता है। रूस-यूक्रेन तथा इजरायल-हमास संघर्ष इसका उदाहरण हैं। गनीमत है कि गाजा में संघर्ष विराम के प्रयासों को सफलता मिल गई है।
हालांकि रूस व यूक्रेन में तनातनी नहीं रुक पाई है। अलबत्ता अफगानिस्तान को कमजोर समझने की मूर्खता पाकिस्तान को नहीं करनी चाहिए। तालिबान के लड़ाके सालों-साल से युद्ध मैदान में सक्रिय हैं। दुश्मनों से निपटने की हर शैली में वह माहिर हैं। संघर्ष न थमने पर वह पाकिस्तान को ऐसे जख्म दे सकते हैं, जिन्हें भरने में काफी समय लग सकता है।



