काशी से गंगाजल घर लाए तो लगेगा भयंकर पाप, वजह जानें
kashi ganga water rules: काशी से गंगाजल घर क्यों नहीं ले जाते? जगद्गुरु शंकराचार्य ने बताया आध्यात्मिक रहस्य। हरिद्वार ऋषिकेश से लाते हैं पर बनारस से नहीं। जानिए पाप लगने का असली कारण।

kashi ganga water rules: आपने देखा होगा कि हरिद्वार या ऋषिकेश जाते ही लोग प्लास्टिक की बोतलें और कांसे के लोटे भरकर पवित्र गंगाजल घर ले आते हैं। पूजा पाठ में इस्तेमाल करते हैं। मगर बनारस यानी काशी आते ही कोई ऐसा करता नजर नहीं आता। सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यों?
अब इसका जवाब खुद जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी ने दिया है। वो बताते हैं कि काशी दुनिया का एकमात्र ऐसा स्थान है जहाँ आने वाला हर जीव मुक्त हो जाता है। यहाँ तक कि गंगा जल में मौजूद छोटे-छोटे कीड़े तक मोक्ष पा लेते हैं। जी हाँ सही सुना आपने।
इस वजह से काशी से का गंगाजल घर नहीं लाया जाता
शंकराचार्य जी कहते हैं कि काशी में गंगा का जल सिर्फ पानी नहीं रह जाता। वो मुक्ति का स्वरूप बन जाता है। अब अगर कोई इसे बोतल में बंद करके घर ले जाए तो इसका मतलब हुआ कि मुक्ति पा चुके जीवों को फिर से बंधन में डाल दिया। ये बहुत बड़ा पाप माना जाता है। इसलिए सदियों से परंपरा चली आ रही है कि काशी का गंगाजल कभी घर नहीं ले जाते।
लोग पूछते हैं कि फिर हरिद्वार में ऐसा क्यों नहीं? तो जवाब ये है कि हरिद्वार में गंगा अभी यात्रा कर रही होती है। वहाँ जल पवित्र तो है लेकिन मुक्ति का अंतिम पड़ाव नहीं। वहीं काशी में गंगा ने अपनी पूरी यात्रा पूरी कर ली है। यहाँ वो शिव की जटाओं से निकलकर उनके कंधे पर विराजमान हो चुकी हैं। इसलिए यहाँ का जल ले जाना मतलब शिव की आज्ञा का उल्लंघन करना है।
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अगली बार जब भी काशी जाएं तो मणिकर्णिका घाट या दशाश्वमेध घाट पर गंगा स्नान जरूर करें। दर्शन करें। लेकिन बोतल लेकर मत जाना। वहाँ का आशीर्वाद तो आपके साथ खुद चलकर आएगा। बस मन साफ रखिए। जय माँ गंगे।



