दक्षिण दिशा को वास्तु में क्यों माना जाता है अशुभ, घर में ये 3 चीजें कभी न रखें

हमारे पुराने शास्त्रों में घर की हर दिशा को अलग-अलग देवता और ग्रहों से जोड़ा गया है। इनमें से उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण को सबसे शुभ माना जाता है तो दक्षिण दिशा को आमतौर पर अशुभ समझा जाता है। वजह यह है कि वास्तु पुरुष के अनुसार दक्षिण दिशा यमराज की दिशा है और इसे मंगल ग्रह भी प्रभावित करता है। इसलिए हमारे बुजुर्ग हमेशा कहते आए हैं कि इस कोने में कुछ खास चीजें रखने से घर में बुरी उर्जा बढ़ती है और सुख-शांति प्रभावित होती है।
आज हम आपको बताते हैं कि दक्षिण दिशा में किन तीन चीजों को रखने से सख्त मना किया गया है। ये बातें सदियों से चली आ रही हैं और आज भी लाखों घरों में इन्हें मानते हुए प्लानिंग की जाती है।
दक्षिण दिशा में इन चीजों को रखने से करें परहेज
पहली बात दीया या दीपक की। शाम को पूजा के वक्त जो दिया जलाते हैं उसे कभी दक्षिण की तरफ नहीं रखना चाहिए। मान्यता है कि इस दिशा में जलाया गया दीपक माता लक्ष्मी को नहीं बल्कि यमराज को समर्पित हो जाता है। इससे घर में धन की देवी रुष्ट हो जाती हैं और बरकत रुक सकती है।
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दूसरी बड़ी गलती जो लोग अनजाने में कर बैठते हैं वह है घर का मंदिर या पूजा घर दक्षिण में बनाना। ज्यादातर लोग जगह की कमी के कारण ऐसा कर लेते हैं लेकिन वास्तु विशेषज्ञ कहते हैं कि इस दिशा में की गई पूजा का कोई फल नहीं मिलता। आप कितनी भी मनोकामना मांग लें वह पूरी नहीं होती क्योंकि ऊर्जा का प्रवाह गलत दिशा में चला जाता है।
तीसरा नियम जूते-चप्पल का है। बहुत से घरों में मुख्य दरवाजा दक्षिण की तरफ खुलता है और लोग वहीं शू-रैक लगा देते हैं। वास्तु में इसे पितरों का अपमान माना गया है। कहते हैं कि इससे घर के बड़े-बुजुर्गों की आत्मा को ठेस पहुंचती है और परिवार में कलह बढ़ने लगता है।



