‘मऊ नट भंजन’ से ‘मऊ नाथ भंजन’ बनने तक का ऐतिहासिक सफर

आज मऊ जिले का मनेगा स्थापना दिवस

सुजीत कुमार, मऊ। उत्तर प्रदेश का मऊ जिला स्वयं में समृद्ध इतिहास और पौराणिकता समेटे हुए है। जनपद से रामायण और महाभारत कालीन स्मृतियां जुड़ी हैं।

प्रदेश के इस पूर्वी भाग को लेकर मान्यता है कि त्रेता युग में महाराज दशरथ के शासनकाल में यहां ऋषियों की तपोभूमि थी। मऊ का ज्ञात अभिलेखीय इतिहास लगभग 1,500 वर्ष पुराना है।

कभी घने जंगलों में निवास करने वाले नट समुदाय के प्रभाव क्षेत्र के रूप में विकसित मऊ ने समय के अनगिनत परिवर्तन देखे हैं। बदलाव के लंबे दौर का साक्षी रहा मऊ आज अपनी सशक्त पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है। 19 नवंबर को मऊ जिला अपनी स्थापना का उत्सव मनाने जा रहा है।

उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल अपने प्राचीन गौरव, समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और प्राकृतिक विरासत के कारण लंबे समय से पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। मऊ स्थित वनदेवी मंदिर, शीतला माता मंदिर, रोज गार्डन, मुक्तिधाम दोहरीघाट और फंटासिया वाटर पार्क एंड रिजॉर्ट पर्यटकों को खासा आकर्षित करते हैं। बावजूद जिले में अनेक ऐसी अल्पज्ञात धरोहरें और प्राकृतिक स्थल मौजूद हैं, जिन्हें उपयुक्त पर्यटक सुविधाओं के विकास के साथ एक सशक्त और आधुनिक पर्यटन केंद्र के रूप में रूपांतरित करने की दिशा में तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं।

मऊ नट भंजन से ‘मऊ’ बनने का सफर

मऊ जिले में लंबे समय तक नट शासन रहा था। सन 1028 के करीब बाबा मलिक ताहिर का अपने भाई मलिक कासिम के साथ आगमन हुआ, जो फौज की एक टुकड़ी के साथ यहां आया था। क्षेत्र पर कब्जे को लेकर मऊ नट एवं मलिक बंधुओं के बीच भीषण युद्ध हुआ।

रक्तपात में मऊ नट का भंजन (मारा गया) हुआ। इसलिए क्षेत्र को ‘मऊ नट भंजन’ कहा जाने लगा। यही कालांतर में ‘मऊनाथ भंजन’ हो गया। सन 1801 में आज़मगढ़ और मऊनाथ भंजन ईस्ट इंडिया कंपनी को मिले और यह क्षेत्र गोरखपुर जनपद में शामिल कर लिया गया। वर्ष 1932 में मऊनाथ भंजन को आजमगढ़ जिले में शामिल किया गया। अंततः साल 1988 में मऊ को आजमगढ़ से अलग कर एक नया जिला घोषित किया गया।

मौर्य, गुप्त और मुगल काल से भी जुड़ा इतिहास

मऊ की पहचान केवल धार्मिक या पौराणिक कहानियों से नहीं जुड़ी है, बल्कि यह एक ऐसा प्राचीन नगर है जहां अलग-अलग शासकों और संस्कृतियों ने अपनी छाप छोड़ी। यह क्षेत्र मौर्य काल, गुप्त साम्राज्य और मुगल शासन के अधीन भी रहा। कहा जाता है कि मुगल शासक शाहजहां ने इस हिस्से को अपनी बेटी जहांआरा को जागीर के रूप में दिया था। इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए मऊ जिला ज्ञान का भंडार है।

जिले में पर्यटन विकास के लिए योजनाएं स्वीकृत

मऊ जनपद के पर्यटन समृद्धि के नए अध्याय की शुरुआत हो चुकी है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की सक्रिय पहल और राज्य सरकार की स्पष्ट प्राथमिकताओं के तहत जिले के लिए मुख्यमंत्री पर्यटन स्थलों के विकास मद से 3.75 करोड़ रुपए की चार महत्वपूर्ण परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें मधुबन विधानसभा क्षेत्र के ग्राम सभा बेलौली स्थित लक्ष्मण मंदिर के पर्यटन विकास पर 01 करोड़ रुपए, मऊ सदर विधानसभा क्षेत्र के देवलास बाबा स्थान के लिए 01 करोड रुपए, घोसी विधानसभा क्षेत्र स्थित नगर पंचायत घोसी स्थित सीता कुंड स्थल के पर्यटन विकास पर 75 लाख रुपए और ग्राम सभा पिढवल स्थित शिव मंदिर के पर्यटन विकास के लिए 01 करोड़ रुपए की धनराशि स्वीकृत हुई है।

मऊ में बढ़ रही पर्यटक संख्या

पर्यटन के लिहाज से मऊ जिला पूर्वांचल का उभरता हुआ जिला है। रामायण और महाभारत काल से जुड़ी मान्यताओं वाले मऊ जनपद में कई अल्पज्ञात पर्यटन स्थल भी हैं, जहां पर्यटक विकास कर लोगों की आवाजाही बढ़ाने का प्रयास जारी है। गोरखपुर, लखनऊ या अन्य रास्तों से भी मऊ पहुंचना सुलभ है। रेल, सड़क की बेहतर कनेक्टिविटी ने जिले में पर्यटन विकास को नया आयाम दिया है। वर्ष 2024 में मऊ आने वाले पर्यटकों की संख्या 6,87,193 रही थी। वर्ष 2025 के जनवरी से जून तक पर्यटक संख्या 3,90,933 रही। पर्यटक आगमन से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है, बल्कि रोजगार के भी नए रास्ते खुले हैं।’

मऊ को बनाएंगे विशिष्ट पर्यटन केंद्र- जयवीर सिंह
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘मऊ केवल पूर्वांचल का एक जिला नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की पुरातन सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत अध्याय है। रामायण युगीन मान्यताओं से लेकर मौर्य और गुप्त कालीन विरासत तक, यह भूमि अपने भीतर अनगिनत कथाएं समेटे हुए है।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में स्वीकृत नई पर्यटन परियोजनाएं न सिर्फ इन धरोहरों को संरक्षित करेंगी, बल्कि मऊ को एक समृद्ध, आधुनिक और आकर्षक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का मार्ग भी प्रशस्त करेंगी। हमारा लक्ष्य है कि मऊ की पहचान देश-विदेश के पर्यटन मानचित्र पर और अधिक उज्ज्वल होकर उभरे।’

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