तेजस्वी या नीतीश, कौन होगा बिहार का अगला सीएम

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए ताजे ऑपिनियन पोल्स, सियासी हलचल जानिए।

Bihar election 2025 opinion poll latest: चुनावी रंग में रंगे बिहार का सियासी पारा उच्चतम स्तर (हाई लेवल) पर है। हर रोज दिलचस्प घटनाक्रम देखने को मिल रहे हैं। विपक्षी गठबंधन में मनमुटाव और टकराव की खबरों के बीच राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने प्रतिद्वंद्वियों को अपनी ताकत का अहसास करा दिया है। चुनाव के ऐन वक्त पर तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री फेस घोषित कर विपक्षी गठबंधन ने सत्ता पक्ष की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

गेंद अब भाजपा और जनता दल (यू) गठबंधन के पाले में है। कांग्रेस और राजद ने यह सवाल पूछने में देर नहीं लगाई कि एनडीए गठबंधन की ओर से कौन सीएम बनेगा? यकीनन यह सवाल भाजपा-जदयू को परेशान करता रहेगा। बिहार में दो चरण में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां चल रही हैं। बिहार में पिछले साढ़े तीन दशक से सत्ता की चाबी राजद या जदयू के पास रही है।

मुख्यमंत्री पद पर नीतीश कुमार सर्वाधिक बीस साल गुजार चुके हैं। यह अनोखा रिकॉर्ड बनाने में वह मतदाताओं के सहयोग से ज्यादा अच्छे भाग्य के कारण कामयाब रहे हैं। किसी भी विधानसभा चुनाव में जदयू आज तक इतने वोट नहीं बटोर पाई कि नीतीश कुमार पूर्ण बहुमत के आधार पर सीएम की कुर्सी पर बैठ जाएं। समय-समय पर नीतीश को समर्थन देकर सीएम बनवाने के पीछे विभिन्न दलों की अपनी-अपनी मजबूरी रही है।

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कांग्रेस-राजद ने जहां भाजपा को रोकने के लिए वहीं भाजपा ने कांग्रेस-राजद को सत्ता में आने से रोकने के मकसद से नीतीश कुमार का समर्थन किया है। बिहार की सियासत में नीतीश को ‘किंग मेकर’ माना जाता है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में एक बयान दिया था कि विधायक दल के निर्णय पर आधार पर अगले सीएम का चयन किया जाएगा। अमित शाह का इशारा साफ था कि आसन्न चुनाव में यदि भाजपा ने बेहतर प्रदर्शन किया तो नीतीश को साइड होना पड़ेगा। शाह के इस बयान पर विपक्ष निरंतर राजनीति कर रहा है।

आसानी से नहीं छूट पाता है कुर्सी का मोह (Bihar election 2025 opinion poll latest)

वैसे सियासत में कुर्सी का मोह आसानी से नहीं छूट पाता है। नीतीश के साथ भी यही कहानी है। वह सत्ता का मोह छोड़ने को तैयार नहीं हैं। बिहार में लालू-राबड़ी के मुख्यमंत्री काल को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। उस दौर में भ्रष्टाचार व अपराध चरम पर था। बॉलीवुड की ‘गंगाजल’ जैसी सुपरहिट फिल्में इस राज्य की असलियत को देशभर के सामने रखने में सफल रही थीं।

बहुचर्चित चारा घोटाला और जमीन के बदले नौकरी जैसे स्कैम लालू परिवार के दामन पर ऐसे दाग हैं, जो कभी नहीं धुल सकते हैं। वैसे जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने चुनावी माहौल के दरम्यान शासन-प्रशासन पर भ्रष्टाचार के कई आरोप मढ़े हैं। इससे बिहार में भाजपा के बड़े नेताओं की असलियत भी सामने आ चुकी है। यानी भ्रष्टाचार की गंगा में डुबकी लगाने में कोई पीछे नहीं रहा है।

देश के उन राज्यों में बिहार शामिल है, जहां लंबे समय से सत्ता की चाबी चुनिंदा पार्टियों के पास रही है। इसके लिए मतदाता अधिक जिम्मेदार हैं। चूंकि चुनाव के समय वह इन दलों के लोक-लुभावन वादों में कैद होकर रह जाते हैं। यह चुनाव बिहार की दशा एवं दिशा को बदलने का होना चाहिए। इसके लिए मतदाताओं को आगे आना पड़ेगा। सत्ता की जिम्मेदारी ऐसी पार्टी को सौंपी जाए, जो अपना नहीं बल्कि राज्य का भला कर सके।

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