कभी हर घर की पहली पसंद रहा वीडियोकॉन, एक गलत फैसले की वजह से ढह गया 20,000 करोड़ का साम्राज्य

Videocon success and fall: क्या आपको 1990 का दशक याद है? उस समय टेलीविज़न में एंटीना हुआ करते थे, और किसी के घर में नया कलर टीवी आने पर पूरे मोहल्ले में खुशी की लहर दौड़ जाती थी। उन दिनों, किसी के घर में वीडियोकॉन का टेलीविज़न या वॉशिंग मशीन दिखना उस परिवार की बढ़ती संपन्नता की निशानी माना जाता था। इस ब्रांड ने भारतीयों के दिलों में इतनी खास जगह बना ली थी कि वीडियोकॉन अब सिर्फ एक कंपनी नहीं रह गई थी—यह हर भारतीय के लिए गर्व का विषय बन गई थी।
महाराष्ट्र के छोटे से शहर छत्रपति संभाजीनगर (पहले औरंगाबाद) से शुरू होकर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाली इस कंपनी का सफर किसी फ़िल्मी कहानी जैसा लगता है। यह एक ऐसी कहानी है जो कंपनी के सफलता के शिखर पर पहुँचने से लेकर, गलत फैसलों की एक श्रृंखला के कारण हुए इसके पतन तक का सफर तय करती है। छत्रपति संभाजीनगर (पहले औरंगाबाद) के रहने वाले वेणुगोपाल धूत नाम के एक युवा के मन में बड़े सपने थे। हालाँकि धूत परिवार का पारंपरिक व्यवसाय खेती और छोटे स्तर के व्यापार से जुड़ा था, मगर वेणुगोपाल कुछ अलग करना चाहते थे। 1980 के दशक की शुरुआत में, भारत में ब्लैक-एंड-व्हाइट टेलीविज़न का दौर था; मगर उन्होंने पहले ही भांप लिया था कि भविष्य में कलर टेलीविज़न की मांग तेजी से बढ़ेगी।
क्या आपको 1990 का दशक याद है? उस समय टेलीविज़न में एंटीना हुआ करते थे, और किसी के घर में नया कलर टीवी आने पर पूरे मोहल्ले में खुशी की लहर दौड़ जाती थी। उन दिनों, किसी के घर में वीडियोकॉन का टेलीविज़न या वॉशिंग मशीन दिखना उस परिवार की बढ़ती संपन्नता की निशानी माना जाता था। इस ब्रांड ने भारतीयों के दिलों में इतनी खास जगह बना ली थी कि वीडियोकॉन अब सिर्फ एक कंपनी नहीं रह गई थी—यह हर भारतीय के लिए गर्व का विषय बन गई थी।
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महाराष्ट्र के छोटे से शहर छत्रपति संभाजीनगर (पहले औरंगाबाद) से शुरू होकर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाली इस कंपनी का सफर किसी फ़िल्मी कहानी जैसा लगता है। यह एक ऐसी कहानी है जो कंपनी के सफलता के शिखर पर पहुँचने से लेकर, गलत फैसलों की एक श्रृंखला के कारण हुए इसके पतन तक का सफर तय करती है। छत्रपति संभाजीनगर (पहले औरंगाबाद) के रहने वाले वेणुगोपाल धूत नाम के एक युवा के मन में बड़े सपने थे। हालाँकि धूत परिवार का पारंपरिक व्यवसाय खेती और छोटे स्तर के व्यापार से जुड़ा था, मगर वेणुगोपाल कुछ अलग करना चाहते थे। 1980 के दशक की शुरुआत में, भारत में ब्लैक-एंड-व्हाइट टेलीविज़न का दौर था; मगर उन्होंने पहले ही भांप लिया था कि भविष्य में कलर टेलीविज़न की मांग तेजी से बढ़ेगी।
अब वीडियोकॉन d2h को कौन नियंत्रित करता है?
वीडियोकॉन d2h कंपनी के कारोबार का एक और अहम हिस्सा है। 2018 में, वीडियोकॉन d2h और डिश टीवी का विलय पूरा हो गया। इसके बाद, वीडियोकॉन d2h एक स्वतंत्र इकाई के रूप में खत्म हो गई और पूरी तरह से डिश टीवी में मिल गई। विलय के बाद, कंपनी का नाम बदलकर ‘डिश टीवी इंडिया लिमिटेड’ कर दिया गया; हालाँकि, ‘d2h’ ब्रांड का इस्तेमाल आज भी होता है। अब वीडियोकॉन ग्रुप वेणुगोपाल धूत या उनके परिवार के नियंत्रण में नहीं है, क्योंकि 2021 में वीडियोकॉन का मुख्य कारोबार वेदांता ग्रुप को सौंप दिया गया था।



