ट्रंप की करारी हार से भारत की खुली लॉटरी; पेट्रोल-डीजल के दाम होंगे धड़ाम, जानें मिडटर्म नतीजों का बड़ा असर

crude oil price petrol diesel India: अमेरिका में सत्ता के समीकरण में बदलाव का असर भारत पर पड़ सकता है। मध्यावधि चुनावों (मिडटर्म इलेक्शन) में डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी की हार के बाद ईरान के साथ संभावित युद्ध को लेकर उन पर दबाव और बढ़ सकता है। इसके अलावा, इन नतीजों का असर भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं पर भी पड़ सकता है। हालांकि राष्ट्रपति के पास कई मुद्दों पर वीटो करने की शक्ति होती है, मगर अमेरिका में बदलता राजनीतिक माहौल कई अहम मामलों को प्रभावित कर सकता है। आइए जानते हैं कि भारत के लिए इसके क्या संभावित परिणाम हो सकते हैं।
मध्यावधि चुनावों में हार के बाद ट्रंप के लिए ईरान के साथ संघर्ष को पूरी तीव्रता से जारी रखना मुश्किल हो सकता है। अगर यह संघर्ष कम होता है या इसका कोई समाधान निकल आता है, तो कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में गिरावट आ सकती है, जिससे भारत की तेल विपणन कंपनियों (ऑयल मार्केटिंग कंपनियों) को फायदा हो सकता है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में कुछ बदलाव या रुकावटें आ सकती हैं, मगर इस बात की संभावना कम है कि यह समझौता पूरी तरह से रुक जाएगा। H-1B वीजा के मामले में, अमेरिकी कांग्रेस की निगरानी बढ़ सकती है, हालांकि किसी बड़े नीतिगत बदलाव की संभावना कम है। इन चुनावी नतीजों का असर वैश्विक बाजार की तरलता (लिक्विडिटी), डॉलर की कीमत, कच्चे तेल के दाम और भारतीय शेयर बाजार के प्रदर्शन पर भी पड़ सकता है।
भारत को क्या फायदा होगा?
मध्यावधि चुनावों में हार के कारण, ईरान के साथ संघर्ष को जारी रखने को लेकर ट्रंप पर दबाव बढ़ सकता है। यह दबाव मुख्य रूप से दो कारणों से होगा: ऐसे संघर्ष के लिए जरूरी सैन्य खर्च और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें। अगर युद्ध की तीव्रता कम होती है या कोई समाधान निकल आता है, तो इसका तुरंत असर वैश्विक तेल और ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है। हालांकि कुछ हद तक भू-राजनीतिक अनिश्चितता बनी रह सकती है, मगर संभावित युद्धविराम से तेल की कीमतों में गिरावट आ सकती है।
भारत अपनी ईंधन जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होता है, तो भारतीय तेल विपणन कंपनियों के लिए आयात लागत कम हो सकती है। अगर आयात लागत कम होती है, तो उपभोक्ता आने वाले महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुछ कमी की उम्मीद कर सकते हैं।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर क्या असर पड़ सकता है?
अमेरिकी कांग्रेस के भीतर सत्ता समीकरणों में बदलाव से भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में कुछ फेरबदल हो सकते हैं या इसमें रुकावटें आ सकती हैं। इस समझौते में न केवल आयात और निर्यात शुल्क, बल्कि ऊर्जा, विनिर्माण क्षेत्र और निवेश से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं। नतीजतन, अमेरिकी सांसदों द्वारा इन पहलुओं की अधिक बारीकी से जांच की जा सकती है, और उनमें से कुछ इन मुद्दों का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए भी कर सकते हैं।
हालांकि, विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस बात की संभावना कम है कि यह समझौता पूरी तरह से खत्म हो जाएगा। कहा जाता है कि रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों ही पार्टियां भारत के साथ संबंध मजबूत करने के पक्ष में हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी कुछ आयात शुल्कों की समीक्षा की मांग कर सकती है और राष्ट्रपति के ऐसे शुल्क लगाने के अधिकार पर सीमाएं लगाने की कोशिश भी कर सकती है।
फिर भी, ऐसे बड़े बदलावों में रुकावटें आ सकती हैं, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति के पास वीटो पावर होती है और उनके पास आयात शुल्क लगाने का स्वतंत्र अधिकार होता है। इसलिए, राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव का मतलब यह नहीं है कि अमेरिकी नीति में तुरंत कोई बदलाव आ जाएगा।
चुनाव नतीजों का H-1B वीजा पर क्या असर पड़ेगा? डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत से अमेरिकी कांग्रेस द्वारा आव्रजन (इमिग्रेशन) नियमों की निगरानी बढ़ सकती है। रिपब्लिकन पार्टी समर्थित कुछ प्रस्ताव फिलहाल के लिए रुक सकते हैं। हालांकि, ऐसा माना जा रहा है कि आव्रजन नीति में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना कम है।
अपने दूसरे कार्यकाल के लिए व्हाइट हाउस लौटने पर, डोनाल्ड ट्रंप ने आव्रजन को लेकर कड़े कदम उठाने की घोषणा की। इसमें नए H-1B वीजा आवेदनों के लिए 100,000 डॉलर की फीस का प्रस्ताव भी शामिल है। वित्त वर्ष 2025 में, मंजूर किए गए सभी H-1B वीजा पाने वालों में से 69.9 प्रतिशत भारत में जन्मे थे; इसलिए, इस नीति का सबसे ज्यादा असर भारतीयों पर पड़ेगा।
भारत को पाकिस्तान को लेकर चिंता क्यों हो सकती है?
डेमोक्रेटिक सांसद ट्रंप प्रशासन और पाकिस्तान के बीच हुए लेन-देन की जांच करने में रुचि ले सकते हैं- खास तौर पर क्रिप्टोकरेंसी क्षेत्र में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर। इस तरह के घटनाक्रम भारत के लिए कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम (सीजफायर) का श्रेय ले चुके हैं। इस बीच, ट्रंप परिवार और पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल के बीच एक समझौते की चर्चा हो रही है। खबरों के अनुसार, इस समझौते से जुड़ी कंपनी में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और उनके बेटों, एरिक और डोनाल्ड जूनियर के पास है।
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इसका भारतीय शेयर बाजार पर क्या असर पड़ेगा?
भारतीय शेयर बाजार को मजबूत घरेलू आर्थिक आधार और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की वापसी से बल मिला है। हालांकि, अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजे वाशिंगटन में सत्ता के संतुलन और डोनाल्ड ट्रंप के रणनीतिक एजेंडे को प्रभावित कर सकते हैं। आने वाले समय में इसका असर वैश्विक बाजार की लिक्विडिटी, डॉलर की कीमत, कच्चे तेल की कीमतों और भारतीय शेयर बाजार पर पड़ेगा।



