Unclothed Women Ritual: 5 दिन तक कपड़े नहीं पहनतीं भारत में यहां की महिलाएं

Unclothed Women Ritual: हिमाचल प्रदेश की शांत, हरी-भरी वादियों में कई ऐसे गांव स्थित हैं जो अपनी प्राचीन और अद्वितीय परंपराओं के लिए प्रसिद्ध हैं। इनमें से एक गांव मणिकर्ण घाटी के पास पिनी वैली या मलाना का कोई दूरदराज इलाका है। यहां एक परंपरा है, जिसे जानकर लोग हैरान रह जाते हैं। इस प्रथा के अनुसार, गांव की महिलाएं कुछ समय तक वस्त्र नहीं पहनतीं। तो आइए इस गांव की इस अद्भुत परंपरा के बारे में जानें।

परंपरा का समय और स्थल

यह विशेष परंपरा हर साल सावन के महीने में अक्सर अगस्त या सितंबर में पांच दिनों तक मनाई जाती है। इन पांच दिनों में गांव में एक तरह का ‘संयम’ और ‘पवित्रता’ का वातावरण बन जाता है।

परंपरा की धार्मिक मान्यता (Tribal Traditions Himachal)

इस परंपरा के पीछे एक पुरानी पौराणिक और लोक विश्वास है। गांव वाले मानते हैं कि इन पांच दिनों में ‘लाहुआ घोंड’ पूरे गांव में वास करता है। देवता के आगमन से यह क्षेत्र अत्यंत पवित्र हो जाता है। माना जाता है कि इस दौरान, महिलाएं कपड़े पहनने से अपवित्र हो सकती हैं या देवता का अपमान कर सकती हैं। वस्त्र न पहनना शुद्धि और आत्म-त्याग का प्रतीक समझा जाता है। इसे एक प्रकार से पापों से मुक्ति और देवी-देवताओं को प्रसन्न करने का तरीका माना जाता है।

पांच दिनों का कठोर अनुशासन

ये पांच दिन गांववासियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं और कई कड़े नियमों का पालन किया जाता है। महिलाएं इस दौरान पूरी तरह निर्वस्त्र रहती हैं, हालांकि वे अपने शरीर को कम्बल या शॉल से ढककर रखती हैं ताकि उनकी गोपनीयता बनी रहे। वे किसी से भी संपर्क नहीं करतीं और पुरुषों से दूर रहती हैं। इन पांच दिनों में पुरुषों को भी कई प्रतिबंधों का पालन करना पड़ता है।

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उन्हें अपनी पत्नियों से दूर रहना होता है और किसी भी प्रकार का मांसाहार या शराब सेवन नहीं करना होता। उन्हें हल्के और साधारण वस्त्र पहनने होते हैं। इस समय गांव में हंसी-मजाक, गाने-बजाने और किसी भी तरह की खुशी मनाना मना होता है। पूरा गांव एक गंभीर और धार्मिक वातावरण में डूबा रहता है।

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