सुबह-सुबह एशिया में आया महाप्रलय; 16 मौतें, 339 मकान जमींदोज, तीन मुल्कों में एक साथ कांपी जमीन

Tibet Earthquake 7.0 Magnitude: एशियाई महाद्वीप के तीन पड़ोसी देशों—चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में शुक्रवार तड़के भूकंप के सिलसिलेवार झटकों से धरती डोल उठी। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इन तीनों मुल्कों में रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 4.1 से लेकर 4.9 के बीच दर्ज की गई है। सबसे पहले पाकिस्तान में सुबह 4:56 बजे 4.9 तीव्रता का तेज झटका आया, जिसका केंद्र जमीन से 15 किलोमीटर की गहराई में था। इसके ठीक बाद अफगानिस्तान में सुबह 5:54 बजे 4.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज हुआ, जिसकी गहराई जमीन से 25 किलोमीटर नीचे आंकी गई। वहीं सुबह 6:05 बजे चीन के भूभाग में 4.4 तीव्रता के झटके महसूस किए गए, जिसका केंद्र भी सतह से 15 किलोमीटर अंदर स्थित था। सुबह-सुबह आए इन झटकों के कारण लोग खौफ के साए में अपने घरों से बाहर निकल आए।

शुक्रवार सुबह के इन झटकों से ठीक पहले, गुरुवार शाम चीन के सुदूर तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में आए 7.0 तीव्रता के महाविनाशकारी भूकंप ने भारी तबाही मचा दी है। इस भीषण आपदा में अब तक कम से कम 16 नागरिकों की जान जा चुकी है, जबकि 54 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। उत्तरी शहर नागचू (Nagqu) में तबाही का सबसे खौफनाक मंजर देखने को मिला है, जहां स्थानीय प्रशासन की प्राथमिक रिपोर्ट के अनुसार 339 रिहायशी मकान पूरी तरह जमींदोज हो गए हैं और मवेशियों के लिए बने 20 आश्रय स्थल नष्ट हो चुके हैं। चीनी सरकारी मीडिया CCTV के अनुसार, यह पिछले पांच वर्षों में तिब्बत की धरती पर दर्ज किया गया सबसे भयानक और शक्तिशाली भूकंप है।

आपदा की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित बीहड़ इलाकों में व्यापक स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है, जिसमें स्थानीय जिले के 1,600 से अधिक प्रशिक्षित राहत कर्मी और सैनिक दिन-रात मलबे में जिंदगियां तलाशने में जुटे हैं। बेघर हुए सैकड़ों परिवारों के लिए प्रशासन ने 1,000 प्रीफैब्रिकेटेड अस्थायी शेल्टर, 3,000 टेंट, फोल्डिंग बेड्स, टॉर्च और कड़ाके की ठंड से बचाने के लिए भारी मात्रा में विंटर क्लोथ्स जैसी जरूरी सामग्री एयरड्रॉप व ट्रकों के जरिए पहुंचाई है। भूकंप के झटकों के चलते क्षेत्र में मोबाइल टावर और संचार लाइनें पूरी तरह ठप हो गई हैं, जबकि एहतियाती कदम उठाते हुए रेलवे नेटवर्क के संचालन को पूरी तरह रोक दिया गया है।

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भूकंप के कारण हुए व्यापक भूस्खलन और पहाड़ों से गिरे भारी पत्थरों की वजह से नेशनल हाईवे 317 (G317) का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह बंद हो गया है। प्रशासन ने इस मार्ग पर आम नागरिकों और निजी वाहनों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हुए केवल सेना, आपातकालीन एम्बुलेंस और सरकारी राहत दस्तों के वाहनों को ही गुजरने की अनुमति दी है। मार्ग से भारी बोल्डर और मलबा हटाने के लिए भारी मशीनरी तैनात की गई है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में अगले तीन दिनों तक रुक-रुक कर भारी बर्फबारी की आशंका है, जिससे माइनस तापमान के बीच चल रहे राहत व बचाव अभियान में भारी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

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