तेजस्वी की राह में ये 3 कांटे, नहीं बनने देंगे मुख्यमंत्री
RJD Bihar polls 2025: बिहार चुनाव 2025 में तेजस्वी यादव के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं। जानें कैसे बदल रही है राघवपुर की सियासत।
RJD Bihar polls 2025: बिहार चुनाव में अब चंद दिन ही शेष है। 14 नवंबर को ये पता चल जाएगा कि राज्य की सत्ता का ताज किसके सर पर सजने वाला है। इन सबके बीच सबसे कठिन राह तेजस्वी यादव की नजर आ रही है।
आरजेडी के प्रमुख नेता और महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार तेजस्वी की चुनावी राह बहुत आसान नहीं होने वाली है। जैसा कुछ समय पहले तक दिख रहा था क्योंकि 243 सदस्य विधानसभा की राजनीतिक गु्थी में अब कई नए और पुराने कारक एक साथ काम कर रहे हैं। इस बार उन्हें सबसे कड़ी टक्कर जन स्वराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर से मिल रही है क्योंकि पीके ने राघवपुर से अपना प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। हालांकि अभी तक उन्होंने खुद को औपचारिक रूप से उम्मीदवार घोषित नहीं किया है।
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आपको बता दें कि तेजस्वी यादव के लिए राघवपुर निर्वाचन क्षेत्र महज एक भौगोलिक स्थान नहीं है बल्कि यह पारिवारिक विरासत से जुड़ा एक गढ़ है। तेजस्वी यादव राघवपुर से दो बार यानी कि 2015 और 2020 में जीते थे। पीके के बाद उनके सामने चुनौती है पारिवारिक मतभेद। सीट बंटवारे की गु्थी सुलझाने के बाद तेजस्वी यादव को अपना सारा फोकस पारिवारिक मतभेद सुलझाने पर लगाना होगा।
दरअसल परिवार की आपसी कला तेज प्रताप यादव का तेजस्वी को सोशल मीडिया पर अनफॉलो करना और अपने अलग राजनीतिक दल बनाना आरजेडी को नुकसान पहुंचा सकता है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां यादव वोट का विभाजन निर्णायक साबित होता है। इन समस्याओं के अलावा वीआईपी नेता मुकेश सहनी ने महागठबंधन की सीटों की गणना को और पेचीदा बना दिया है।
तीसरा कांटा हैं ओवैसी। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के विरुद्ध भी उन्हें अपनी रणनीति बनानी होगी क्योंकि सीमांचल में ओवैसी आरजेडी कांग्रेस के लिए चुनौती का सबब हो सकते हैं।



