मध्यस्थता से समाधान: रूबी-नीरज फिर साथ रहने को राजी

8 साल पुराने दांपत्य विवाद का सुलझा, डीएलएसए के मध्यस्थता केंद्र में बनी सहमति

इटावा। आठ वर्षों से चले आ रहे दांपत्य विवाद का आखिरकार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण डीएलएसए के मध्यस्थता केंद्र में समाधान हो गया। पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेद बातचीत और मध्यस्थता के जरिए समाप्त हो गए। दोनों ने पुराने विवादों को भुलाकर एक बार फिर साथ रहने और अपने तीन बच्चों के साथ परिवार को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।

प्रकरण वाद संख्या 690/2026, रूबी बनाम नीरज आदि, थाना सैफई से संबंधित था। मामला न्यायालय सिविल जज (जू.डि.) एफटीसी/जेएम (महिलाओं के विरुद्ध अपराध), इटावा द्वारा मध्यस्थता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मध्यस्थता केंद्र भेजा गया था।

दो सितंबर को मध्यस्थता केंद्र में दोनों पक्षों की मौजूदगी में वार्ता कराई गई। लगातार संवाद और समझाइश के बाद पति-पत्नी ने स्वेच्छा से लिखित समझौता कर अपने पुराने मतभेद समाप्त करने पर सहमति जताई। यह मध्यस्थता अधिवक्ता विद्याराम भारती ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की जज/सचिव आरती द्विवेदी के निर्देशानुसार कराई।

पत्नी की ओर से पूर्व में आरोप लगाया गया था कि विवाह के बाद अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर उसे मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। पारिवारिक विवाद बढ़ने पर उसे ससुराल से अलग रहना पड़ा। वर्ष 2018 की एक घटना को लेकर मारपीट, धमकी और उत्पीड़न के आरोपों के संबंध में भी न्यायालय की शरण ली गई थी।

मध्यस्थता के दौरान दोनों पक्षों ने विवादों को पीछे छोड़कर नई शुरुआत करने का निर्णय लिया। समझौते के अनुसार पति ने पत्नी और बच्चों को सम्मानपूर्वक अपने साथ रखने, उनके इलाज एवं आवश्यक देखभाल की जिम्मेदारी निभाने का भरोसा दिलाया। साथ ही किसी प्रकार की शारीरिक, मानसिक अथवा आर्थिक प्रताड़ना और अनुचित मांग न करने पर भी सहमति बनी।

समझौते में दोनों पक्षों ने भविष्य में एक-दूसरे को शिकायत का अवसर न देने और आपसी समझदारी के साथ शांतिपूर्वक वैवाहिक जीवन बिताने का निर्णय लिया। दंपति की दो पुत्रियां और एक पुत्र हैं। दोनों ने बच्चों के भविष्य को देखते हुए परिवार को फिर से व्यवस्थित करने की इच्छा जताई। पत्नी ने भी समझौते के आधार पर संबंधित मामले में आगे कार्रवाई न रखने पर सहमति व्यक्त की।

आठ साल से न्यायालयी प्रक्रिया में उलझा पारिवारिक विवाद आखिरकार संवाद और आपसी सहमति से सुलझ गया।डीएलएसए की मध्यस्थता ने टूटते रिश्ते को जोड़ने का रास्ता तैयार किया और एक परिवार को नई शुरुआत का अवसर मिला।

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