राजेश खन्ना की वो फिल्म, जिसे वितरकों ने ‘फ्लॉप’ मान लिया था, फिर ऐसे बनी बॉलीवुड की पहली ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर
rajesh Khanna flop films: राजेश खन्ना के करियर की शुरुआत से लेकर 1969 में उनकी सुपरहिट फिल्मों और ‘आराधना’ के ब्लॉकबस्टर बनने तक की दिलचस्प कहानी, जानें कैसे एक फिल्म ने बदल दी उनकी किस्मत और दर्शकों की सोच।

rajesh Khanna flop films: भारतीय सिनेमा के इतिहास में राजेश खन्ना को उस अभिनेता के रूप में याद किया जाता है जिनकी लोकप्रियता ने दर्शकों के बीच एक अलग ही दीवानगी पैदा कर दी थी। मगर उनकी यह पहचान एकदम से नहीं बनी। शुरुआती दौर में उनका करियर लगातार संघर्ष से गुजर रहा था।
1966 में उन्होंने फिल्मों में कदम रखा। अगले कुछ सालों तक उनका सफर आसान नहीं रहा। कई फिल्मों में काम करने के बावजूद सफलता लगातार उनसे दूर रही। ज्यादातर प्रोजेक्ट्स या तो असफल रहे या औसत प्रदर्शन तक ही सीमित रह गए।
1969 बना करियर का टर्निंग पॉइंट
साल 1969 राजेश खन्ना के लिए गेम चेंजर साबित हुआ। इस एक साल में उनकी छह फिल्में रिलीज हुईं और सभी ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया।
इसी साल आई फिल्म आराधना ने उन्हें नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। यह फिल्म आगे चलकर हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी सफल फिल्मों में शामिल हो गई और इसे ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर का दर्जा मिला।
हालांकि इस सफलता की राह आसान नहीं थी और फिल्म के निर्माण के दौरान कई बड़ी चुनौतियां सामने आईं।
कहानी की शुरुआत और नाम बदलने का फैसला
- आराधना की कहानी लेखक सचिन भौमिक ने शक्ति सामंत को सुनाई थी। कहानी पसंद आने के बाद उन्होंने इसे फिल्म बनाने का निर्णय लिया।
- शुरुआत में फिल्म का नाम सुबह प्यार की रखा गया था। मगर बाद में टीम को लगा कि यह नाम कहानी की भावना को पूरी तरह नहीं दर्शाता। इसके बाद फिल्म का नाम बदलकर आराधना कर दिया गया।
- यह कहानी हॉलीवुड फिल्म To Each His Own से प्रेरित मानी जाती है।
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कास्टिंग में बड़ा बदलाव
- फिल्म एक महिला प्रधान कहानी थी। शुरुआत में मुख्य भूमिका के लिए अपर्णा सेन को चुना गया था। उन्होंने कहानी को पसंद किया और फिल्म के लिए तुरंत सहमति दे दी।
- मगर शूटिंग शुरू होने से पहले उन्होंने प्रोजेक्ट छोड़ दिया क्योंकि डेट्स की समस्या थी।
- इसके बाद यह भूमिका शर्मिला टैगोर को मिली। उनकी एंट्री ने फिल्म की दिशा को मजबूत कर दिया।
राजेश खन्ना की भूमिका और बढ़ता भरोसा
- फिल्म में राजेश खन्ना को लीड हीरो के किरदार में लिया गया था। शुरुआत में उनका स्क्रीन टाइम सीमित था और कहानी में उनका किरदार जल्दी समाप्त हो जाता था।
- उस समय उनका करियर उतार पर था। मगर बड़े बैनर की यह फिल्म उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर आई। उन्होंने इस मौके को पूरी तरह स्वीकार किया।
- शर्मिला टैगोर के साथ काम करने का अनुभव भी उनके लिए खास माना गया।
क्लाइमेक्स को लेकर आया बड़ा बदलाव
- शूटिंग से पहले फिल्म को एक और चुनौती का सामना करना पड़ा। एक दूसरी फिल्म के प्रीमियर में यह पाया गया कि आराधना का क्लाइमेक्स उससे मिलता-जुलता है।
- इस बात से टीम चिंतित हो गई। बाद में लेखक गुलशन नंदा ने कहानी में बदलाव का सुझाव दिया।
- क्लाइमेक्स को नया रूप दिया गया और कहानी को और प्रभावशाली बनाया गया।
इसी दौरान गुलशन नंदा ने यह भी सुझाव दिया कि राजेश खन्ना का किरदार डबल रोल में होना चाहिए। यह बदलाव फिल्म के लिए बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
रिलीज से पहले कम उम्मीदें
- फिल्म पूरी होने के बाद भी वितरकों में इसे लेकर ज्यादा उत्साह नहीं था। राजेश खन्ना उस समय नए कलाकारों में गिने जाते थे, इसलिए फिल्म से ज्यादा उम्मीदें नहीं थीं।
- हालांकि फिल्म के गाने रिलीज से पहले ही लोकप्रिय हो चुके थे। इसके बावजूद शुरुआती शो में दर्शकों की प्रतिक्रिया ठंडी रही।
- कई लोगों को लगा कि फिल्म ज्यादा नहीं चलेगी।
धीरे-धीरे बदली तस्वीर
- रिलीज के कुछ दिनों बाद ही स्थिति बदलने लगी। दर्शकों की संख्या बढ़ने लगी और सिनेमाघरों में भीड़ उमड़ने लगी।
- पहले सप्ताह के अंत तक कई शो हाउसफुल होने लगे। एक महीने बाद भी मुंबई के रॉक्सी थिएटर जैसे बड़े सिनेमाघरों में लगातार शो चल रहे थे।
- यह फिल्म धीरे-धीरे एक बड़ी हिट से सुपरहिट और फिर ब्लॉकबस्टर बन गई।
कमाई और असर
- रिपोर्ट्स के अनुसार फिल्म का बजट लगभग 80 लाख रुपये था। वहीं इसकी कमाई करीब 7 करोड़ रुपये तक पहुंची।
- इस सफलता ने न सिर्फ राजेश खन्ना के करियर को नई पहचान दी बल्कि दर्शकों की पसंद भी बदल दी।
- इसके बाद लोग उन्हें उनके खास स्टाइल और स्क्रीन प्रेजेंस के लिए पहचानने लगे।



