जापान में बड़ा आर्थिक संकट; 30 साल का ‘येन कैरी ट्रेड’ टूटा; ग्लोबल मार्केट में बड़े उलटफेर का डर

जापान इस समय एक बड़े आर्थिक संकट का सामना कर रहा है और यह संकट और भी बुरा होने की संभावना है। इन्वेस्टमेंट बैंकर सार्थक आहूजा ने सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए इस बारे में गंभीर चेतावनी दी है। उनके मुताबिक, जापान में 30 साल पुरानी परंपरा के टूटने से देश की इकॉनमी के लिए बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। दुनिया भर के इन्वेस्टर्स के लिए जापान की ग्लोबल आर्बिट्रेज मशीन जिसे ‘येन कैरी ट्रेड’ कहा जाता है, अब खत्म हो रही है।

‘येन कैरी ट्रेड’ क्या है?

दशकों से जापान में इंटरेस्ट रेट 0% के करीब या कभी-कभी नेगेटिव रहे हैं। इसने जापान को ग्लोबल इन्वेस्टर्स के लिए एक पसंदीदा जगह बना दिया। इंस्टीट्यूशन्स और विदेशी इन्वेस्टर्स जापान से बहुत सस्ते रेट पर येन उधार लेते थे और उतनी ही रकम US, इंडिया या दूसरे मार्केट में इन्वेस्ट करते थे, जहाँ बॉन्ड और इक्विटी 4% से 8% रिटर्न दे रहे थे। 0% पर उधार लो और 5% कमाओ। इंटरेस्ट रेट में यह बड़ा अंतर इन्वेस्टर्स के लिए एक बड़ा प्रॉफिट था। जापान के ‘येन कैरी ट्रेड’ का मकसद उधार को सस्ता रखना था, ताकि कंपनियाँ और घर खर्च और इन्वेस्ट कर सकें।

30 साल का ट्रेंड टूटा!

जब तक जापान के इंटरेस्ट रेट कम थे, यह बिज़नेस आसानी से चल रहा था। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। जापान में इंटरेस्ट रेट बढ़कर 2.8% हो गए हैं, जो 30 साल में सबसे ज़्यादा रेट है। जापान में महंगाई दर 25 साल में पहली बार 2.5% से ऊपर चली गई है। इससे बैंक ऑफ़ जापान को मार्केट डिमांड कम करने के लिए इंटरेस्ट रेट बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा है। जापान ने इस 30 साल पुरानी ‘ग्लोबल आर्बिट्रेज मशीन’ को बंद कर दिया है और आहूजा ने चेतावनी दी है कि ग्लोबल मार्केट इसके लिए तैयार नहीं है।

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बढ़ते कर्ज के बोझ का संकट

आहूजा ने इस बदलाव की वजह से जापान पर बढ़ते कर्ज के बोझ को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। अगर जापान में इंटरेस्ट रेट 3% से आगे जाते हैं, तो जापान की GDP का 2.5 गुना कर्ज का बोझ और बढ़ जाएगा। इस कर्ज़ को मैनेज करना मुश्किल हो सकता है। ‘कैरी ट्रेड’ पर प्रॉफ़िट मार्जिन अब लगभग खत्म हो गया है, जिससे इन्वेस्टर्स में घबराहट फैल रही है। इन्वेस्टर्स अब जापानी कर्ज़ चुकाने के लिए अपने विदेशी इन्वेस्टमेंट, खासकर US में बेच सकते हैं। इससे ग्लोबल स्टॉक मार्केट पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।

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