Lunar Eclipse 2026: ग्रहण के दौरान देवघर ढके रहते हैं और मंदिर भी बंद रहते हैं, वजह जानें

Lunar Eclipse 2026: आज, 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण है। ऐसे समय में हम देखते हैं कि ग्रहण के समय से ही मंदिरों के दरवाज़े बंद कर दिए जाते हैं या घर को पर्दे से ढककर भगवानों को ढक दिया जाता है। ऐसा सिर्फ़ धार्मिक मान्यताओं के कारण ही नहीं होता, बल्कि कुछ आध्यात्मिक और एनर्जी से जुड़े कारण भी बताए जाते हैं।

हालांकि साइंस के हिसाब से ग्रहण काल ​​एक खगोलीय घटना है, मगर भारतीय परंपरा में इस समय को बहुत सेंसिटिव माना जाता है। इस दौरान भगवान की मूर्तियों को ढकने के पीछे ये मुख्य कारण हैं:

1. नेगेटिव एनर्जी का असर

शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के दौरान राहु और केतु का असर बढ़ जाता है और वातावरण में बहुत ज़्यादा नेगेटिव तरंगें फैल जाती हैं। मंदिर या देवालय में मूर्तियां ‘प्रतिष्ठित’ होती हैं, जिसका मतलब है कि उनमें एनर्जी का सोर्स होता है। देवताओं को ढक दिया जाता है ताकि ग्रहण की नुकसानदायक किरणें इस एनर्जी पर बुरा असर न डालें।

2. ‘वेध’ और ‘सूतक’ काल

ग्रहण के वेध काल (सूतक काल) के दौरान, पूरा माहौल ‘अशुद्ध’ माना जाता है। ऐसे समय में भगवान को छूना या उनकी पूजा करना मना है। भगवान की मूर्तियों की पवित्रता बनाए रखने और उन पर नेगेटिविटी का असर न हो, इसके लिए उन्हें पर्दे के पीछे रखा जाता है।

3. भगवान का ‘संकट’ काल

‘ग्रहण’ शब्द का मतलब है ‘पकड़ना’ या ‘निगलना’। पौराणिक कथाओं के अनुसार, ग्रहण को सूरज या चांद पर आने वाला संकट माना जाता है। जब सृष्टि को चलाने वाले ग्रह संकट में होते हैं, तो भगवान को भी ‘आराम’ या ‘एकांत’ दिया जाता है। इस दौरान, भगवान की पूजा किए बिना सिर्फ मन में जाप किया जाता है।

4. मूर्तियों की सुरक्षा

कुछ ग्रंथों के अनुसार, ग्रहण के दौरान निकलने वाली तरंगें मूर्तियों के पत्थर या धातु पर असर डाल सकती हैं। जैसे हम खाने पर तुलसी के पत्ते डालते हैं, वैसे ही भगवान की मूर्तियों को भी सुरक्षित रखने के लिए कपड़े से ढक दिया जाता है।

ग्रहण के बाद क्या किया जाता है?

  • ग्रहण के तुरंत बाद भगवान के दरवाज़े नहीं खोले जाते। पहले ये रस्में की जाती हैं:
  • शुद्धिकरण: पूरे मंदिर या भगवान के घर को पानी से साफ़ किया जाता है।
  • अभिषेक: भगवान की मूर्तियों पर पंचामृत या शुद्ध पानी का अभिषेक किया जाता है, ताकि ग्रहण का असर खत्म हो जाए।
  • नैवेद्य: उसके बाद ही भगवान को ताज़ा खाना या नैवेद्य चढ़ाया जाता है।
  • घर पर भी, ग्रहण के बाद भगवान की पूजा की जाती है और नैवेद्य चढ़ाया जाता है।

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चंद्र ग्रहण का समय (इंडियन स्टैंडर्ड टाइम)

खगोलीय गणना के अनुसार, ग्रहण का समय इस प्रकार होगा:

  • पेनमब्रल फेज़: 1:42 PM
  • पार्शियल फेज़: 2:50 PM
  • टोटल फेज़ शुरू: 4:04 PM
  • मैक्सिमम एक्लिप्स: 4:54 PM
  • टोटल फेज़ खत्म: 5:44 PM
  • पार्शियल फेज़ खत्म: 6:58 PM

(भारत में, सुबह 6 AM के बाद से ग्रहण देखना वैज्ञानिक रूप से सही माना जाता है।)

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