Ladakh News in Hindi: लद्दाख में अशांति, जानें कारण और मांगे
लद्दाख में 'जेन Z रिवॉल्यूशन' की दस्तक और पूर्ण राज्य की मांग को लेकर हिंसक प्रदर्शन। जानें क्यों बिगड़े हालात।

Ladakh News in Hindi: नेपाल के बाद क्या भारत में ‘जेन जी रिवॉल्यूशन’ ने दस्तक दे डाली है? क्या युवाओं की सोच बदल रही है? क्या बदलाव के लिए शांतिपूर्ण तरीके से विरोध-प्रदर्शन करना अब गुजरे जमाने की बात हो चुकी है? बगैर उपद्रव और हिंसा के क्या बदलाव संभव नहीं है? केंद्र शासित राज्य Ladakh में अचानक बिगड़े हालात से चिंतित होना वाजिब है।
Ladakh में उपद्रव से जुड़ी जिस प्रकार की तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, वह वाकई चिंताजनक हैं। जम्मू-कश्मीर के मुकाबले Ladakh को बेहद शांति प्रिय क्षेत्र माना जाता रहा है। वहां के नागरिकों का व्यवहार कभी ऐसा नहीं रहा, जैसा आज देखने को मिल रहा है। सड़कों पर उपद्रव, भाजपा कार्यालय में आगजनी, वाहनों को आग के हवाले करना जैसे दृश्य हर किसी के मन को विचलित कर रहे हैं।
हिंसक आंदोलन में प्रोटेस्ट क्यों (Ladakh Protest News)
Ladakh को पूर्ण राज्य का दर्जा न मिलने के विरोध में ये हिंसक आंदोलन सामने आया है। हालात बिगड़ने पर पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अपना अनशन समाप्त करना पड़ा है। Ladakh में सोनम वांगचुक बड़ा नाम हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए वह लंबे समय से संघर्षरत हैं। Ladakh के ताजा हालात को उन्होंने ‘जेन जी रिवॉल्यूशन’ करार देकर केंद्र सरकार की चिंता बढ़ा दी है।
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क्या है प्रदर्शनकारियों की मांगे (Ladakh Protest Demand)
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के अलावा इसे संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग जोर पकड़ रही है। देश में लेह-Ladakh को पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। वहां देश-विदेश से प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं। Ladakh का शांत वातावरण सैलानियों को आकर्षित करता रहा है, मगर जिस प्रकार की परिस्थितियां वहां उत्पन्न हुई हैं, इससे पर्यटन पर भी प्रतिकूल असर पड़ना तय है।
चिंता इस बात की भी है कि Ladakh की देखा-देखी कहीं जम्मू-कश्मीर में भी हालात न बिगड़ जाएं। ‘जेन जी रिवॉल्यूशन’ ने कुछ दिन पहले भारत के पड़ोसी देश नेपाल को हिलाकर रख दिया था। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाए जाने से नाराज युवाओं ने सड़कों पर आकर सरकार विरोधी मुहिम शुरू कर दी थी। हालात को काबू में करने के लिए सरकार ने लाठीचार्ज और गोली चलाने के आदेश दे दिए थे। गोलीबारी में डेढ़ दर्जन से अधिक प्रदर्शनकारियों की जान चली गई थी। इसके बाद स्थिति और बिगड़ गई।
फिलवक्त नेपाल की कमान कार्यवाहक पीएम सुशीला कार्की संभाल रही हैं। Ladakh का मामला क्या सिर्फ ट्रेलर है? क्या राष्ट्र विरोधी ताकतें देश में नेपाल जैसे हालात पैदा करना चाहती हैं? नेपाल में बदले घटनाक्रम के बहाने भारत में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट की भरमार देखने को मिली थी। राष्ट्र एवं समाज विरोधी तत्वों ने मौके का फायदा उठाने का भरपूर प्रयास किया था। वहीं देशभर की जनता की निगाह Ladakh News in Hindi पर बनी हुई है।



