महिलाओं को स्वावलम्बी बनाने में अतुलनीय हैं कुसुमा त्रिपाठी के प्रयास

हजारों महिलाओ एवं बच्चियों को आत्मनिर्भर बनाने का किया काम

रायबरेली। बड़े शहरों में महिलाओं की बंदिशों को तोड़ कर समाज के लिए नए आयाम देने के कई उदाहरण मिल जाते हैं लेकिन अब छोटे शहरों की महिलाएं भी अपने संघर्षों से समाज के लिए प्रेरणा श्रोत बन रही हैं ऐसी ही हैं रायबरेली की कुसुमा त्रिपाठी, जो लम्बे समय से स्वयंसेवी संस्था के माध्यम से समाज को ना केवल जागरूक कर रही हैं बल्कि बच्चियों व महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

कुसुमा त्रिपाठी ने वर्ल्ड वेलफेयर आर्गेनाइजेशन के माध्यम से कई उल्लेखनीय कार्य किए हैं। समाज के लिए कुछ बेहतर करने की सोंच के चलते कुसमा त्रिपाठी ने 1999 में इस संस्था की शुरुआत की थी। जिसके माध्यम से नाबार्ड द्वारा समर्थित एक परियोजना के अंतर्गत 2013-2014 के बीच बुनाई, कढ़ाई व सिलाई जैसे कौशलों का प्रशिक्षण देकर हजारों महिलाओ एवं बच्चियों को आत्मनिर्भर बनाने का काम किया है।

कुसमा त्रिपाठी के नेतृत्व में संस्था ने 2024 से इरकान इंटरनेशनल लिमिटेड के सीएसआर फण्ड के तहत एक परियोजना के माध्यम से 50 विद्यालयों में सेनेटरी पैड वेंडिग मशीन व इंसीनेरेटर स्थापित करवाए गए, साथ ही संस्था के द्वारा छात्राओं व महिलाओं को मासिक धर्म के समय स्वच्छता के प्रति जागरूक करते हुए सेनेटरी पैड वितरित करवाए गए। कुसुमा त्रिपाठी के कार्य महिला स्वास्थ्य एवं गरिमा की दिशा में अतुलनीय प्रयास हैं।

आर. पी. राजन
ब्यूरो चीफ स्टार एक्सप्रेस

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