जख्मी शेर का पलटवार: अमेरिकी एयरबेस धुआं-धुआं, झुकने को तैयार नहीं ईरान
Israel Iran war 2026: एक तरफ भारत में नागरिकों पर मस्ती और रंगों के त्योहार होली की खुमारी छाने को तैयार है, दूसरी ओर अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच खूनी खेल की शुरुआत हो गई है। निश्चित रूप से समूची दुनिया पर यह नए संकट का आगाज है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई, रक्षा मंत्री एवं सेना प्रमुख के अलावा खामेनेई की बेटी, दामाद व नाती की हवाई हमले में मौत के बाद तनाव चरम पर पहुंच गया है।
जख्मी ईरान ने पलटवार करने में देरी नहीं की है। इजरायल के अलावा विभिन्न देशों में मौजूद अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाया गया है। दोनों पक्ष एक-दूसरे को अधिक से अधिक नुकसान पहुंचाने का दावा कर रहे हैं। अमेरिका-इजरायल काफी समय से ईरान के खिलाफ हमले की तैयारी में जुटे थे। दोनों पक्ष में कई बार वार्ता के बावजूद विवाद दूर नहीं हो पाया। परमाणु कार्यक्रम से पीछे न हटने की कीमत ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई को अपनी जान गंवाकर चुकानी पड़ी है।
ईरान सहित पूरी दुनिया दो खेमों में विभाजित
खामेनेई की मौत के बाद ईरान सहित पूरी दुनिया दो खेमों में विभाजित नजर आ रही है। एक खेमे ने खामेनेई के अंत को जायज ठहराया है। जबकि दूसरा खेमा अमेरिका-इजरायल की कार्रवाई का खुलकर विरोध कर रहा है। भारत व पाकिस्तान में भी खामेनेई के समर्थन में आवाज उठी है। पाकिस्तान में जहां अमेरिकी वाणिज्य दूतावास में बवाल होने की खबर है, वहीं भारत के जम्मू-कश्मीर में भी विरोध-प्रदर्शन आरंभ हो गए हैं।
माना जा रहा है कि इजरायल और सऊदी अरब के उकसावे में आकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दया न दिखाने का सख्त फैसला लिया था। वेनेजुएला के बाद अमेरिका ने ईरान पर दूसरी बड़ी कार्रवाई कर अपने प्रतिद्वंद्वियों को शॉक्ड कर दिया है। कहा जाता है कि युद्ध की शुरुआत करना आसान होता है, मगर इसे बंद करना मुश्किल होता है।
ईरान को इन दो सुपरपॉवरों का समर्थन
रूस-यूक्रेन युद्ध को तीन साल से अधिक गुजर चुके हैं। बेशक यूक्रेन को युद्ध की बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है, मगर लाभ में रूस भी नहीं है। ईरान के पक्ष में चीन व रूस जैसी बड़ी ताकतों का खुलकर सामने न आना तेहरान की चिंता बढ़ा रहा है।
जानकारों का मानना है कि यह दोनों देश पिछले दरवाजे से तेहरान की मदद कर रहे हैं। अमेरिका व इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने की दो प्रमुख वजह मानी जाती हैं। पहला यह कि तेहरान का परमाणु कार्यक्रम सफल होने पर भविष्य में अमेरिका-इजरायल के सिर पर गंभीर खतरा मंडराना शुरू हो जाएगा। दूसरा कारण फिलिस्तीन में सक्रिय हमास आतंकियों को ईरान की तरफ से सपोर्ट मिलना है।
हमास व इजरायल की दुश्मनी जगजाहिर है। सवाल यह कि नए युद्ध की शुरुआत से क्या तीसरे विश्व युद्ध का आगाज हो चुका है? क्या ईरान धर्म के आधार पर मुस्लिम मुल्कों को अमेरिका-इजरायल के खिलाफ एकजुट करने में सफल हो जाएगा? इस बीच भारत के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हाल की घटनाओं से भारत काफी चिंतित है।
युद्ध का असली कारण क्या, ईरान ऐसा क्या कर रहा है जो अमेरिका-इज़राइल नहीं चाहते
हम सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव ना बढ़ाने और आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील करते हैं। जबकि चीन ने कहा कि ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए। कुल मिलाकर संकट की इस घड़ी में विभिन्न देश सिर्फ बयान देने तक सीमित हैं। कोई भी देश इस संघर्ष का हिस्सा बनने से परहेज कर रहा है।



