पाकिस्तान मध्यस्थता के लिए सही देश नहीं है, ईरानी सांसद का सनसनीखेज बयान

Israel Iran US War : ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग के प्रवक्ता इब्राहिम रज़ाई ने इस मामले पर एक बयान जारी किया है। “पाकिस्तान में मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए ज़रूरी विश्वसनीयता की कमी है।”
सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘X’ पर शेयर की गई एक पोस्ट में, रज़ाई ने पाकिस्तान को “एक अच्छा दोस्त और पड़ोसी” बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि “वह एक सही मध्यस्थ नहीं है।” उन्होंने पोस्ट में आगे कहा कि पाकिस्तान का झुकाव हमेशा अमेरिका के हितों की तरफ़ ही रहता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान खुले तौर पर अमेरिका की आलोचना करने से बच रहा है। पाकिस्तान कभी भी इस बात को प्रमुखता से नहीं उठाता कि अमेरिका अपने वादों को पूरा करने में नाकाम रहा है—चाहे वह लेबनान पर हमलों का मामला हो या ईरान की संपत्तियों को ज़ब्त करने का। उन्होंने आगे कहा कि एक मध्यस्थ को हमेशा निष्पक्ष रहना चाहिए और किसी एक पक्ष की तरफ़ झुकाव नहीं रखना चाहिए।
अब्बास अराक़ची के कूटनीतिक प्रयास
इस सांसद का बयान ऐसे समय में आया है, जब ईरान के उप विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची बातचीत को जारी रखने के लिए तेज़ी से कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं। अराक़ची तीन दिनों में दूसरी बार इस्लामाबाद गए, जहाँ उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ चल रहे संघर्ष और आगे के संभावित रास्तों पर चर्चा की।
इससे पहले, अराक़ची ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल सईद के साथ चर्चा के बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ से मुलाक़ात की थी। ओमान में हुई चर्चाओं का मुख्य केंद्र ‘होरमुज़ जलडमरूमध्य’ और क्षेत्रीय सुरक्षा था।
ईरानी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, ये चर्चाएँ केवल परमाणु मुद्दे तक ही सीमित नहीं हैं। इनमें होरमुज़ जलडमरूमध्य के लिए एक नए कानूनी ढाँचे के प्रस्ताव, मुआवज़े की माँगें, भविष्य में किसी भी सैन्य कार्रवाई के ख़िलाफ़ गारंटी, और अमेरिका द्वारा लगाए गए समुद्री प्रतिबंधों को हटाने जैसे मुद्दे शामिल हैं। इस्लामाबाद में कुछ समय रुकने के बाद, अराक़ची अब मॉस्को जाने वाले हैं।
ट्रंप की सीधी बातचीत की अपील
दूसरी तरफ़—भले ही अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को सुलझाने के कूटनीतिक प्रयास ठप पड़ गए हों—अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अहम बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान बातचीत करना चाहता है, तो वह सीधे हमसे संपर्क करने के लिए स्वतंत्र है। ट्रंप का यह बयान तब आया है जब अमेरिका ने पहल करने से कदम पीछे खींच लिए और पाकिस्तान में होने वाली बातचीत का तय दौर रद्द कर दिया।
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फॉक्स न्यूज़ के साथ एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “अगर वे बात करना चाहते हैं, तो वे हमारे पास आ सकते हैं या हमें कॉल कर सकते हैं। आप जानते हैं, वहाँ एक टेलीफ़ोन है। हमारे पास सुरक्षित लाइनें उपलब्ध हैं।”



