भारत की इस चीज का जादू दुनिया भर में छाया, बड़े बड़े सुपर पॉवर देश हैं पीछे

Indian rice in World: कल्पना कीजिए कि एक साधारण दाना कितनी दूर तक की यात्रा कर सकता है। सिंधु घाटी की प्राचीन सभ्यता से शुरू होकर आज पूरी दुनिया के भोजन में शामिल होने वाला भारतीय चावल खासकर बासमती अपनी सुगंध और स्वाद के लिए मशहूर है। भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक और निर्यातक देश है जो वैश्विक बाजार में मजबूत पकड़ रखता है।

प्राचीन जड़ें और मुगल काल की चमक

भारतीय चावल की कहानी हजारों साल पुरानी है। सिंधु घाटी में मिले अवशेष बताते हैं कि यहां चावल की खेती बहुत पहले से हो रही थी। लेकिन बासमती को असली पहचान मुगल दौर में मिली जब इसे महकदार अनाज कहा जाने लगा। मुगल बादशाह इसके दीवाने थे और इसे शाही दावतों में शामिल करते थे। ब्रिटिश राज में भारत ने चावल का निर्यात शुरू किया जो धीरे धीरे बढ़ता गया।

बीसवीं सदी में हरित क्रांति ने सब कुछ बदल दिया। 1960 और 70 के दशक में नई किस्में और बेहतर सिंचाई से उत्पादन कई गुना बढ़ गया। इसके बाद 1970-80 में भारत ने अफ्रीका और मध्य पूर्व के देशों में बड़े पैमाने पर चावल भेजना शुरू किया। आज बासमती की खेती मुख्य रूप से पंजाब हरियाणा और उत्तर प्रदेश में होती है जहां मिट्टी और मौसम की खासियत इसे अनोखा बनाती है।

वैश्विक बाजार पर भारत की मजबूत पकड़

भारत वैश्विक चावल निर्यात में करीब 30 से 40 फीसदी हिस्सा रखता है। सऊदी अरब इराक ईरान और कई अफ्रीकी देश इसके बड़े खरीदार हैं। हाल के सालों में भारत ने रिकॉर्ड निर्यात किया है और 2024-25 में उत्पादन नई ऊंचाई पर पहुंचा। अच्छी बारिश और नई जलवायु सहनशील किस्मों ने किसानों को मजबूत बनाया है।

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हालांकि चुनौतियां भी कम नहीं। 2007 से 2011 और फिर 2023 में सूखे की वजह से निर्यात पर रोक लगानी पड़ी जिससे दुनिया भर में चावल के दाम बढ़ गए। इन घटनाओं ने साबित किया कि भारत की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। वैश्विक बाजार में कोई बड़ा बदलाव भारत के फैसलों से प्रभावित होता है।

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