रूस से सस्ता तेल खरीदने पर 100% टैरिफ की धमकी! भारत का अमेरिका को दो टूक जवाब- ‘नहीं झुकेगा हिंदुस्तान’

India rejects US tariff threat: रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) आयात करने वाले देशों पर शिकंजा कसने के लिए अमेरिका ने अपनी विधायी प्रक्रिया तेज कर दी है। अमेरिकी सीनेट से भारी समर्थन से पारित हो चुका प्रतिबंध बिल अब प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में पेश किया जा चुका है, जिस पर गुरुवार को अंतिम मतदान होने की संभावना है। यदि यह कानून पास हो जाता है, तो रूस से बड़े पैमाने पर ऊर्जा संसाधन खरीदने वाले देशों पर सीधे 100 प्रतिशत दंडात्मक आयात शुल्क (इंपोर्ट टैरिफ) लगाया जा सकता है। इस प्रस्तावित कानून का सीधा असर भारत और चीन जैसी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं पर डालने की कोशिश की जा रही है।

‘1.4 अरब नागरिकों का हित सर्वोपरि’, भारत ने अमेरिकी दबाव को सिरे से नकारा

अमेरिका की इस खुली आर्थिक चेतावनी के बावजूद भारत ने किसी भी प्रकार के दबाव में आने से साफ इनकार कर दिया है। नई दिल्ली ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए संदेश दिया है कि वाशिंगटन चाहे कोई भी नीति बनाए, भारत अपनी राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और हितों से कोई समझौता नहीं करेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को आधिकारिक बयान में जोर देकर कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक प्राथमिकताओं से जुड़े सभी फैसले अपने 140 करोड़ नागरिकों के कल्याण को केंद्र में रखकर लेता है और आगे भी इसी नीति पर अडिग रहेगा। भारत सरकार से जुड़े सूत्रों का भी कहना है कि वे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन रूस से कच्चे तेल के आयात की रणनीति में कोई बदलाव नहीं होगा।

सीनेट से 86-11 के भारी बहुमत से पास हुआ ‘लिंडसे ग्राहम बिल’

इस कड़े कानून को ‘लिंडसे ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध बिल’ के नाम से जाना जाता है। अमेरिकी उच्च सदन (सीनेट) ने इसे 86 के मुकाबले महज 11 वोटों के भारी अंतर से अपनी हरी झंडी दी थी। इस कानून का मुख्य मसौदा रूसी कच्चे तेल के शीर्ष पांच आयातक देशों पर शत-प्रतिशत टैरिफ थोपने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। कानून के समर्थकों का दावा है कि इस आर्थिक प्रहार के जरिए रूस को तेल से होने वाली कमाई पर रोक लगाई जा सकेगी, जिससे वैश्विक राजनीति में मॉस्को पर दबाव बढ़ेगा।

ईरान संघर्ष के कारण अमेरिका में हथियारों की कमी; अधिकारी ने समस्या मानी, ट्रंप नीति हुई फेल

कानून में भारत का नाम जोड़ने पर अड़े सांसद, 10 देशों की बनी हिटलिस्ट

शुरुआती मसौदे में सामान्य रूप से “रूस से तेल आयात करने वाले राष्ट्रों” का उल्लेख किया गया था, लेकिन अब कई अमेरिकी सांसदों ने बिल में कड़े संशोधनों की मांग रख दी है। सांसदों का प्रस्ताव है कि बिल में भारत का नाम स्पष्ट तौर पर दर्ज किया जाए ताकि प्रतिबंधों के क्रियान्वयन में कोई संशय न रहे। इसके साथ ही शीर्ष 10 आयातक मुल्कों की औपचारिक सूची तैयार कर उन सभी पर 100% टैरिफ लगाने की वकालत की जा रही है। इस प्रस्तावित सूची में भारत और चीन के अलावा तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान के नाम शामिल किए गए हैं।

Related Articles

Back to top button