ब्रिक्स सम्मेलन में पीएम मोदी के पीछे खड़े इस युवा ने खींचा सबका ध्यान: जानिए कौन है ये शख्स

Who is Siddharth Babu: देश की राजधानी नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसी दिग्गज विकासशील अर्थव्यवस्थाओं से मिलकर बने इस संगठन की ताकत नए सदस्यों के जुड़ने से और अधिक बढ़ चुकी है।
दुनिया की 40 फीसदी से अधिक आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूत भागीदारी रखने वाले इस समूह की बैठक में आर्थिक सहयोग, वैश्विक शांति और बहुध्रुवीय व्यवस्था पर ऐतिहासिक चर्चाएं हुईं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन बड़े फैसलों के बीच सोशल मीडिया पर एक युवा अधिकारी की मौजूदगी ने करोड़ों यूजर्स का ध्यान खींचा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ठीक पीछे खड़े होकर वैश्विक नेताओं के संवाद को सहज बनाने वाले यह युवा विशेषज्ञ कोई और नहीं, बल्कि वरिष्ठ राजनयिक इंटरप्रेटर सिद्धार्थ बाबू हैं।
गणतंत्र दिवस के वीआईपी मंच से ब्रिक्स तक: पीएम मोदी के बने कूटनीतिक सेतु
उच्चस्तरीय कूटनीति के मंच पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ सिद्धार्थ बाबू की यह पहली मौजूदगी नहीं है। इससे पहले जनवरी 2026 में देश के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान भी कर्तव्य पथ के वीआईपी मंच पर वे इसी अहम भूमिका में नजर आए थे। उस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई बेहद संवेदनशील बातचीत का सफल अनुवाद करते हुए वे कैमरों में कैद हुए थे।
दुनिया के सबसे बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वैश्विक नेताओं के बेहद करीब रहकर भाषा और विचारों के बीच एक मजबूत सेतु का काम करते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय हलकों में अपनी गहरी छाप छोड़ी है।
कूटनीतिक अनुवादक का दायित्व बेहद संवेदनशील क्यों माना जाता है
शिखर सम्मेलनों और अनौपचारिक द्विपक्षीय वार्ताओं के दौरान केवल शब्दों का सीधा अनुवाद करना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि इसके पीछे गहन कूटनीतिक समझ की जरूरत होती है। पहली बात, राजनयिक भाषा का सटीक इस्तेमाल बेहद आवश्यक है; किसी शब्द का गलत चयन दो देशों के संबंधों पर असर डाल सकता है। इंटरप्रेटर का प्राथमिक कार्य नेताओं के भाव, बात के लहजे और रणनीतिक मंशा को उसी तीव्रता के साथ संप्रेषित करना होता है।
दूसरी बात, अत्यधिक गोपनीयता और भरोसा है; शीर्ष नेताओं के बीच की बातचीत रणनीतिक और गोपनीय होती है, जिसके लिए प्रधानमंत्री के इतने करीब मौजूद व्यक्ति पर अटूट विश्वास अनिवार्य है। तीसरी चुनौती रियल-टाइम अनुवाद यानी तत्परता की होती है, जहां नेता के बोलते ही बिना किसी देरी के विचार को दूसरी भाषा में सामने रखना होता है।
पर्दे के पीछे की मेहनत से अंतरराष्ट्रीय फलक तक का सफर
सोशल मीडिया पर ब्रिक्स सम्मेलन की तस्वीरों के जरिए भले ही सिद्धार्थ बाबू का चेहरा आम जनता के बीच तेजी से वायरल हुआ हो, लेकिन कूटनीति के क्षेत्र में उनका यह सफर लंबे अभ्यास और समर्पण का परिणाम है। 77वें गणतंत्र दिवस से लेकर नई दिल्ली ब्रिक्स सम्मेलन तक, विदेश नीति के पर्दे के पीछे काम करने वाले ऐसे कुशल अधिकारी भारत के अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक कद को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में अमूल्य भूमिका निभा रहे हैं।
कोच्चि से निकले होनहार: जानिए कौन हैं सिद्धार्थ बाबू
केरल के कोच्चि शहर के रहने वाले सिद्धार्थ बाबू एक उच्च प्रशासनिक अधिकारी हैं, जो अपनी शांत कार्यशैली, बौद्धिक संयम और स्पष्ट दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने वर्ष 2016 की प्रतिष्ठित संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा (UPSC CSE) में अखिल भारतीय स्तर पर 15वीं रैंक (AIR 15) हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा कोच्चि के भवन वरुण विद्यालय से पूरी करने के बाद उन्होंने कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, तिरुवनंतपुरम (CET) से आर्किटेक्चर में स्नातक की डिग्री ली।
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सिद्धार्थ के पिता बाबू वी. केरल वॉटर अथॉरिटी से रिटायर्ड एग्जीक्यूटिव इंजीनियर हैं, जबकि उनकी मां शीला प्रतिष्ठित महाराजा कॉलेज में प्रोफेसर रही हैं। घर के बौद्धिक माहौल, बिना किसी अनावश्यक तनाव के निरंतर एकाग्रता और सकारात्मक सोच ने ही उन्हें देश के शीर्ष कूटनीतिक अभियानों का प्रमुख हिस्सा बनाया है।


