गंभीर युग में शर्मसार हुई टीम इंडिया: आयरलैंड ने 0-2 से चटाई धूल, कोच के नाम जुड़े ये 38 बेहद शर्मनाक रिकॉर्ड्स

Gambhir Coaching Record: भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर के कोचिंग करियर पर एक ऐसा दाग लग गया है, जिसे मिटाना नामुमकिन होगा। वर्ल्ड चैंपियन और आईसीसी टी20 रैंकिंग में नंबर-1 पायदान पर काबिज टीम इंडिया को रैंकिंग में 11वें नंबर की टीम आयरलैंड ने टी20 सीरीज में 0-2 से हरा दिया है। जुलाई 2026 में गौतम गंभीर को टीम इंडिया का मुख्य कोच बने पूरे 2 साल होने जा रहे हैं, लेकिन इन दो सालों में भारतीय क्रिकेट ने सफलता से ज्यादा ऐतिहासिक हार का सामना किया है। बैक-टू-बैक दो टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली चैंपियन टीम का आयरलैंड जैसी टीम के सामने इस तरह सरेंडर करना बेहद चौंकाने वाला है। आइए देखते हैं कोच गौतम गंभीर का वो पूरा रिपोर्ट कार्ड, जिसने भारतीय क्रिकेट इतिहास को शर्मसार कर दिया है।

श्रीलंका से लेकर न्यूजीलैंड तक: घरेलू मैदानों पर ढहा टीम इंडिया का किला

गौतम गंभीर की कोचिंग में भारतीय टीम ने अपने ही घर में वो दिन देखे हैं जो पिछले कई दशकों में नहीं देखे गए थे। श्रीलंका के खिलाफ जहां 27 साल बाद भारत कोई द्विपक्षीय वनडे सीरीज हारा, वहीं 3 मैचों की वनडे सीरीज में पहली बार टीम के सभी 30 विकेट गिरे। इतना ही नहीं, 45 साल बाद ऐसा हुआ जब भारत वनडे क्रिकेट में एक पूरे कैलेंडर वर्ष में एक भी जीत दर्ज नहीं कर सका।

घरेलू टेस्ट मैचों की बात करें तो न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत को 36 साल बाद अपने घर में टेस्ट हारना पड़ा। बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में 19 साल बाद और मुंबई के वानखेड़े में 12 साल बाद भारत को टेस्ट में शिकस्त मिली। इतिहास में पहली बार भारतीय टीम घरेलू मैदान पर 50 रन से कम के स्कोर पर ऑलआउट हो गई।

ऐतिहासिक क्लीन स्वीप और बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में करारी शिकस्त

गंभीर के कार्यकाल में भारत को 12 साल बाद घरेलू जमीन पर टेस्ट सीरीज गंवानी पड़ी। न्यूजीलैंड ने भारत को उसके इतिहास में पहली बार घरेलू टेस्ट सीरीज में 3-0 से वाइटवॉश (क्लीन स्वीप) किया। वानखेड़े टेस्ट में भारतीय टीम पहली बार घर पर 200 से कम (147 रन) का टारगेट चेज़ करने में नाकाम रही।

विदेशी दौरों और आईसीसी इवेंट्स की बात करें तो भारत 10 साल बाद बैक-टू-बैक टेस्ट सीरीज हारा और 10 साल बाद ही प्रतिष्ठित बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी भी ऑस्ट्रेलिया के हाथों गंवा दी। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में भारत 12 साल बाद 3 मैच हारा और मेलबर्न में 13 साल बाद शिकस्त का सामना करना पड़ा। इस खराब प्रदर्शन का सबसे बड़ा खामियाजा यह रहा कि भारतीय टीम पहली बार वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के फाइनल के लिए क्वालिफाई करने में नाकाम रही।

इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका के दौरों पर शर्मनाक सरेंडर

इंग्लैंड दौरे पर भी गंभीर की रणनीति पूरी तरह फेल साबित हुई। लीड्स टेस्ट में 5 शतक लगाने के बाद भी मैच हारने वाली भारत इतिहास की पहली टीम बनी। साथ ही, 92 साल के टेस्ट इतिहास में भारत सिर्फ दूसरी बार 350 से ज्यादा रनों का टारगेट डिफेंड करने में नाकाम रहा। लॉर्ड्स में भारत सिर्फ दूसरी बार इंग्लैंड के खिलाफ 200 से कम का टारगेट चेज़ नहीं कर पाया और मैनचेस्टर में 11 साल बाद भारत ने किसी मैच में 600 से ज्यादा रन लुटाए।

साउथ अफ्रीका के खिलाफ भी भारत ने 25 साल बाद अपनी धरती पर घरेलू टेस्ट सीरीज गंवाई। एडिलेड में 17 साल बाद वनडे मैच हारे और ईडन गार्डन्स में लगातार 9 जीत के बाद, 8 साल में पहली बार कोई इंटरनेशनल मैच हारे। घर पर 124 रनों के सबसे कम स्कोर का पीछा करते हुए भी टीम इंडिया फेल रही। साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट मैच में भारत को अपने इतिहास की सबसे बड़ी (408 रन) हार झेलनी पड़ी और किसी मेहमान टीम द्वारा भारत में सेट किया गया अब तक का सबसे बड़ा टारगेट (549 रन) भी भारत ने इसी दौरान खाया। 30 साल बाद ऐसा हुआ जब भारत ने बिना किसी बल्लेबाज के शतक के घरेलू टेस्ट सीरीज खत्म की।

न्यूजीलैंड और आयरलैंड के खिलाफ अनचाहे रिकॉर्ड्स की झड़ी

सीमित ओवरों के क्रिकेट में भी शर्मनाक रिकॉर्ड्स की झड़ी लगी रही। साउथ अफ्रीका ने पहली बार भारत के खिलाफ 300+ (359 रन) का सफल रनचेज़ किया, तो न्यूजीलैंड ने भारत में अपना सबसे बड़ा रनचेज़ (285 रन) दर्ज किया। भारत पहली बार न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज हारा, पहली बार इंदौर में वनडे मैच हारा और पहली बार कीवियों के खिलाफ वनडे सीरीज का निर्णायक मैच हारा।

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इस पूरे सिलसिले का सबसे खराब दौर तब आया जब आईसीसी टी20 रैंकिंग की बादशाह टीम इंडिया पहली बार इंटरनेशनल क्रिकेट के इतिहास में आयरलैंड के खिलाफ कोई मैच हारी और सीरीज भी 0-2 से गंवा बैठी। 2 साल के इस कार्यकाल ने गंभीर की कोचिंग शैली और टीम इंडिया के भविष्य पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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