childhood hypertension causes: जानें बच्चों में हाई बीपी की समस्या क्यों

childhood hypertension causes: हाई बीपी को आमतौर पर वृद्ध लोगों की बीमारी माना जाता था। मगर हाल ही में हाई बीपी की समस्या युवाओं को भी परेशान करने लगी है। ये कोई असामान्य बात नहीं है, अब तो 7-8 साल के बच्चे भी हाई बीपी से पीड़ित हो रहे हैं। एक हालिया अध्ययन में पाया गया है कि अगर सिर्फ़ सात साल की उम्र में बल्ड प्रेशर बढ़ जाता है, तो जीवन में आगे चलकर यानी पचास साल की उम्र में प्रवेश करने से पहले ही हृदय रोग से मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। यह शोध अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के हाई बीपी वैज्ञानिक सत्र 2025 में प्रस्तुत किया गया था और JAMA जर्नल में भी प्रकाशित हुआ है।

हाई बीपी कितना खतरनाक  (is hypertension danger)

ये रिसर्च कम उम्र (7 साल के बच्चों में) में बल्ड प्रेशर के प्रभाव की जाँच करने वाला पहला शोध था। पिछले अध्ययनों में पाया गया था कि 12 साल की उम्र के बच्चों में पाया जाने वाला hypertension या हाई बीपी हृदय रोग से मृत्यु के चांस को बढ़ाता है। हालाँकि, अब इन नए निष्कर्षों के अनुसार, यह जोखिम और भी पहले, यानी सात साल की उम्र से ही शुरू हो जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, ये भारत के लिए ज़्यादा चिंता का सबब है। क्योंकि, यहाँ के अध्ययनों के अनुसार, बच्चों में हाई बीपी का प्रचलन तेज़ी से बढ़ रहा है।

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2021 में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि लगभग 7% भारतीय बच्चे और किशोर हाई बीपी से पीड़ित हैं। 2005 के बाद से यह दर तेज़ी से बढ़ी है। यह जोखिम विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में अधिक पाया गया। मोटे बच्चों में यह जोखिम और भी अधिक है। मोटे बच्चों में यह जोखिम 29% पाया गया, जबकि सामान्य वजन वाले बच्चों में यह जोखिम 7% पाया गया।

कार्डियोथोरेसिक और कार्डियोवैस्कुलर सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. अमन कहते हैं कि बच्चों में बल्ड प्रेशर की जाँच मुख्यतः ‘अवसरवादी’ रूप से की जाती है। यानी, बल्ड प्रेशर की जाँच तभी की जाती है जब बच्चा मोटा हो, उसका पारिवारिक इतिहास हो या अन्य समस्याएँ हों। इस संबंध में नियमित जाँच अभी भी भारत में प्रचलित नहीं है। आईये जाने कि causes of childhood hypertension क्या है।

बच्चों में बल्ड प्रेशर की समस्या के कारण (Causes of hypertension in kids)

  • बच्चों के लिए आवश्यक बाल चिकित्सा बल्ड प्रेशर कफ की कमी
  • प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा में अन्य प्राथमिकताओं के कारण बच्चों में hypertension की जांच पर कम ध्यान
  • पढ़ाई की टेंशन
  • स्क्रीन टाइम यानी मोबाइल, टीवी, कंप्यूटर का ज़्यादा इस्तेमाल
  • शारीरिक गतिविधि में कमी
  • जंक फ़ूड, फ़ास्ट फ़ूड, प्रोसेस्ड फ़ूड, ज़्यादा नमक और चीनी का सेवन
  • नींद की कमी और उससे जुड़ी टेंशन।

अर्थात बचपन से ही बल्ड प्रेशर की जांच की ज़रूरत समझी जाती है, मगर व्यवहार में इसका क्रियान्वयन कम होता है और इससे भविष्य में हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

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