भारत में रोज खाते हैं ये 5 चीजें, विदेशों में इनके इस्तेमाल पर कड़े प्रतिबंध; जानें वजह

Foods Banned Abroad Eaten in India: भारतीय खान-पान में स्वाद को हमेशा सेहत से ऊपर रखने की आदत अब एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या का रूप ले चुकी है। इसी स्वाद के फेर में देश में डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है।

चौंकाने वाला तथ्य यह है कि भारतीय रसोई और स्ट्रीट फूड में रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली ऐसी कई चीजें हैं, जिन्हें अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया समेत कई विकसित देशों में उनकी विषाक्तता के चलते प्रतिबंधित किया जा चुका है। मशहूर न्यूट्रिशनिस्ट सुमन अग्रवाल ने एक हालिया सोशल मीडिया विश्लेषण में ऐसे 5 प्रमुख खाद्य पदार्थों और आदतों को उजागर किया है, जो विदेशों में बैन होने के बावजूद भारत में धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहे हैं।

पान मसाला और गुटखा: ओरल कैंसर का सबसे बड़ा कारण

अमेरिका, यूके और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में पान मसाला और गुटखे की बिक्री और उपभोग पर कड़े कानूनी प्रतिबंध लागू हैं। इसके विपरीत, भारत के गली-मोहल्लों में इनका सेवन बेहद सामान्य बात मानी जाती है। मेडिकल साइंस के अनुसार, गुटखा और पान मसाला में मौजूद तंबाकू और सुपारी प्रमाणित कार्सिनोजेन (कैंसर पैदा करने वाले तत्व) हैं। इनका नियमित सेवन सीधे तौर पर ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस, मुंह और गले के जानलेवा कैंसर के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।

मिलावटी दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स: लिवर और किडनी पर सीधा वार

न्यूजीलैंड, यूके, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में डेयरी उत्पादों की शुद्धता को लेकर मानक बेहद कड़े हैं और मिलावट पर भारी जुर्माने व सजा का प्रावधान है। वहीं भारत में सिंथेटिक दूध, डिटर्जेंट, यूरिया और हानिकारक रसायनों से तैयार पनीर व मावे की मिलावट के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। लंबे समय तक ऐसे मिलावटी डेयरी उत्पादों का सेवन शरीर के मुख्य फिल्टर अंगों—लिवर और किडनी—को गंभीर रूप से डैमेज कर देता है, जिससे ऑर्गन फेलियर की नौबत आ जाती है।

वनस्पति तेल: ट्रांस फैट का भंडार, हार्ट अटैक का मुख्य ट्रिगर

वनस्पति घी या हाइड्रोजनेटेड वेजिटेबल ऑयल को अमेरिका में साल 2018 से ही खाद्य पदार्थों में उपयोग के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह इसमें मौजूद अत्यधिक ट्रांस फैट है, जो सीधे तौर पर खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को बढ़ाता है और धमनियों को ब्लॉक कर दिल के दौरे की वजह बनता है। भारत में आज भी हलवाई, स्ट्रीट फूड विक्रेता, बेकरी उद्योग और पैकेज्ड स्नैक्स निर्माता कम लागत के चक्कर में बड़े पैमाने पर वनस्पति तेल का इस्तेमाल कर रहे हैं।

सिंथेटिक फूड डाई: मिठाई और मंचूरियन में जहर जैसा रंग

भारत में जलेबी, गुलाब जामुन, कॉटन कैंडी, चाऊमीन और गोबी मंचूरियन जैसी डिशेज को आकर्षक और चटख बनाने के लिए कृत्रिम रंगों (फूड डाई) का इस्तेमाल होता है। वैश्विक स्तर पर यूरोपीय संघ और अन्य विकसित देशों में रोडामाइन-बी और खतरनाक सिंथेटिक रंगों पर पूरी तरह पाबंदी है या उन्हें बेहद सख्त सीमा में रखा गया है। इन केमिकलयुक्त रंगों के लंबे समय तक सेवन से बच्चों में व्यवहार संबंधी विकार, एलर्जी और वयस्कों में कैंसर का खतरा साबित हो चुका है।

चाय-कॉफी छोड़िए! न्यूट्रिशनिस्ट ने बताए 3 ऐसे जादुई देसी ड्रिंक्स, मिनटों में लौट आएगी शरीर की खोई ऊर्जा

अजीनोमोटो (MSG): स्ट्रीट फूड का स्वाद, नसों का नुकसान

फास्ट फूड और खासकर देसी चाइनीज व पैकेज्ड नूडल्स का स्वाद बढ़ाने के लिए मोनोसोडियम ग्लूटामेट यानी अजीनोमोटो (MSG) का अंधाधुंध इस्तेमाल किया जाता है। दुनिया के कई देश इसके स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए इसके उपयोग को कड़े नियमों में बांध चुके हैं या इसे प्रतिबंधित कर चुके हैं। भारत में स्वाद का जादू जगाने वाले इस केमिकल का अत्यधिक सेवन सिरदर्द, सीने में भारीपन, नसों की कमजोरी और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी कई पुरानी बीमारियों का मुख्य कारण बन रहा है।

Related Articles

Back to top button