सती चरित्र,शिव विवाह प्रसंग सुन भक्त हुए भाव-विभोर
हरिनाम संकीर्तन से गूंजा चिंताहरण धाम

जसवंतनगर,इटावा। क्षेत्र के बलरई स्थित प्रसिद्ध चिंताहरण धाम कारसदेव खाटूश्याम मंदिर में चल रहे श्रीमद्भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस पर श्रद्धा,भक्ति और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रीधाम वृंदावन से पधारे सुप्रसिद्ध कथाव्यास पूज्य निशांत कृष्ण जी महाराज ने सती चरित्र और भगवान शिव-विवाह के दिव्य प्रसंग का मार्मिक वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति और धर्म के गूढ़ संदेशों से अवगत कराया।
कथाव्यास ने कहा कि भागवत एवं पुराणों में वर्णित सती चरित्र त्याग, मर्यादा और आत्मसम्मान का प्रतीक है। भगवान शिव का जीवन वैराग्य, करुणा और लोककल्याण की प्रेरणा देता है। उन्होंने बताया कि शिव-पार्वती विवाह केवल एक वैवाहिक प्रसंग नहीं, बल्कि शक्ति और शिव के दिव्य मिलन का प्रतीक है, जो संसार के संतुलन और सृष्टि के संचालन का आधार माना गया है। कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर हरिनाम संकीर्तन में झूम उठे।
कथा में राजा परीक्षित की भूमिका मंदिर के महंत सुनील महाराज एवं उनकी धर्मपत्नी सोनी देवी निभा रहे हैं, जबकि यज्ञपति के रूप में सुरेश डीलर एवं उनकी धर्मपत्नी सीता देवी विराजमान हैं। कथाव्यास निशांत कृष्ण जी महाराज आगामी दिनों में श्रीमद्भागवत की विभिन्न लीलाओं और प्रसंगों का रसपान कराएंगे। प्रतिदिन कथा के उपरांत भव्य भजन-कीर्तन, महाआरती एवं प्रसाद वितरण का आयोजन किया जा रहा है।
आयोजन को लेकर चिंताहरण धाम कारसदेव खाटूश्याम मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे पुष्पों, आकर्षक विद्युत झालरों और मनोहारी रोशनी से सजाया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं, जिसके चलते प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। कथा पंडाल में पूरे समय “हर-हर महादेव” और “राधे-राधे” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा।



