भारत में राजनीति का गिरता स्तर और घुसपैठ की बढ़ती समस्या

देश में राजनीति का स्तर निरंतर गिर रहा है। कोई न कोई राजनीतिज्ञ अक्सर शर्मनाक और गैर जिम्मेदार बयान देकर विवाद उत्पन्न कर देता है । खासकर शिक्षित, जिम्मेदार और अनुभवी नेता से जहरीली तथा सड़क छाप भाषा की उम्मीद नहीं की जाती है, मगर नेता हैं कि मानते नहीं हैं। सियासी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ बोलते समय जब-तब वह अपनी सभी हदें पार कर जाते हैं। ताजा मामला उत्तर प्रदेश का है।
जहां समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति बेहद अशोभनीय टिप्पणी कर नए सियासी विवाद को जन्म दे दिया है। देश में घुसपैठियों के सवाल पर अखिलेश यादव एकाएक उखड़ गए।
उन्होंने सीएम योगी पर कटाक्ष कर उन्हें उन्हें भी घुसपैठिया बता दिया। सपा मुखिया का कहना था कि यूपी में भी घुसपैठिए हैं। सीएम खुद उत्तराखंड से हैं। हम तो चाहते हैं कि उन्हें उनके राज्य वापस भेज दिया जाए। घुसपैठ और घुसपैठियों की ज्वलंत समस्या पर अखिलेश यादव का यह जवाब समझ से परे है। उनके बयान पर भाजपा भड़क गई है। यूपी सरकार में मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने सपा मुखिया पर पलटवार किया है।
उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव का यह बयान उनके मानसिक दिवालियापन का प्रमाण है। घुसपैठियों से योगी आदित्यनाथ की तुलना करना अखिलेश का बौद्धिक दिवालियापन है। यह मामला तूल पकड़ने के प्रबल आसार हैं।
दरअसल देश के विभिन्न राज्यों में अवैध घुसपैठ रूक नहीं पाई है। बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक अपना नाम एवं पहचान बदल कर रह रहे हैं। देशभर में घुसपैठियों की तादाद पांच करोड़ से अधिक होने का अनुमान है।
पश्चिम बंगाल, केरल, असम, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर आदि राज्यों में घुसपैठियों की भरमार है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कुछ दिन पहले दावा किया था कि कुछेक राजनीतिक दल घुसपैठियों को वोट बैंक की तरह मानते हैं।
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उन्होंने यह सवाल भी उठाया था कि गुजरात और राजस्थान की सीमाओं पर घुसपैठ क्यों नहीं होती। अखिलेश यादव के ताजा बयान को इसी का जवाब माना जा रहा है। सही मायने में अवैध घुसपैठियों की समस्या से अमेरिका जैसा ताकतवर मुल्क भी अछूता नहीं है। कुछ माह पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिका से घुसपैठियों को ताकत के दम पर स्वदेश भेजा गया था। अमेरिकी विमान में जिस हालात में भारतीयों को लाया गया था, उसने पूरी दुनिया को शॉक्ड कर दिया था।
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अमेरिकी प्रशासन के अमानवीय तरीके की घोर आलोचना की गई थी। भारत में बढ़ती आबादी परेशानी का सबब बनी है। ऊपर से घुसपैठियों का बोझ भी झेलना पड़ रहा है। इस गंभीर समस्या का अब तक कोई ठोस समाधान नहीं मिल पाना चिंताजनक है।
देश में सभी राजनीति दलों को इस मसले पर राजनीति करने की बजाए देशहित में एकजुट होने की जरूरत है। कांग्रेस, सपा, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), राजद, आम आदमी पार्टी (आप) जैसे कई दल अक्सर घुसपैठियों का बचाव करते नजर आते हैं। यह दल आरोप लगाते हैं कि घुसपैठियों के नाम पर एक समुदाय विशेष के व्यक्तियों को परेशान किया जा रहा है।
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को ही कटघरे में खड़ा करती रही हैं। उन्होंने यह बात कई बार दोहराई है कि घुसपैठ की समस्या को रोकने के लिए गृह मंत्रालय पिछले ग्यारह साल से क्या कर रहा है? इससे साफ है कि जब-जब घुसपैठ व घुसपैठियों की बात आएगी, तब-तब विपक्षी दल सरकार का सहयोग करने की बजाए बेवजह के सवाल उठाते रहेंगे।



