विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की निर्वाचक नामावलियों के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण की तिथियां घोषित

07 फरवरी 2026 को होगा मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन

मऊ। विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की निर्वाचक नामावलियों के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण के लिए तिथियों की घोषणा कर दी गई है। इस संबंध में अपर जिला अधिकारी/उप जिला निर्वाचन अधिकारी सत्यप्रिय सिंह ने बताया कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तर प्रदेश के निर्देशानुसार अर्हता तिथि 01 जनवरी 2026 को आधार मानते हुए निर्वाचक नामावलियों का विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण कराया जाएगा।

उन्होंने बताया कि निर्वाचन आयोग द्वारा इस पुनरीक्षण कार्य के लिए विस्तृत कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। तैयारी, प्रशिक्षण और मुद्रण कार्य की अवधि 28 अक्टूबर से 03 नवंबर 2025 तक रखी गई है। इसके बाद 04 नवंबर से 04 दिसंबर 2025 तक गणना कार्य संपन्न कराया जाएगा। इसी दौरान मतदान केंद्रों का युक्तिकरण कार्य 04 दिसंबर 2025 को किया जाएगा।

अपर जिला अधिकारी ने बताया कि नियंत्रण तालिका का अद्यतन और ड्राफ्ट रोल की तैयारी 05 से 08 दिसंबर 2025 के बीच होगी, जबकि मतदाता सूची का प्रारूप (ड्राफ्ट रोल) 09 दिसंबर 2025 को प्रकाशित किया जाएगा। ड्राफ्ट रोल के प्रकाशन के बाद दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि 09 दिसंबर 2025 से 08 जनवरी 2026 तक निर्धारित की गई है।

इसी क्रम में नोटिस जारी करना, सुनवाई, सत्यापन और गणना प्रपत्रों पर निर्णय सहित दावे और आपत्तियों के निपटान की अवधि 09 दिसंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक रहेगी। इसके उपरांत मतदाता सूची के स्वास्थ्य मापदंडों की जांच एवं अंतिम प्रकाशन के लिए अनुमति प्राप्त करने का कार्य 03 फरवरी 2026 तक पूरा किया जाएगा। अंततः मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 07 फरवरी 2026 को किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत 04 नवंबर से 04 दिसंबर 2025 के मध्य, 27 अक्टूबर 2025 तक अद्यतन किए गए सभी मतदाताओं का विवरण बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के माध्यम से प्राप्त किया जाएगा। बीएलओ प्रत्येक मतदाता को गणना प्रपत्र, जिसके पिछली ओर सूचना प्रपत्र मुद्रित रहेगा, वितरित करेंगे। मतदाता इस प्रपत्र में अपनी जानकारी भरकर हस्ताक्षर सहित बीएलओ को वापस देंगे। इससे मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की त्रुटि या दोहराव को दूर किया जा सकेगा।

अपर जिला अधिकारी ने मतदाताओं से अपील की कि वे अपने मतदाता विवरण की जांच अवश्य करें और यदि कोई त्रुटि, नाम या पते में सुधार की आवश्यकता हो, तो निर्धारित अवधि में दावा या आपत्ति दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि सटीक और अद्यतन मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद होती है, इसलिए प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम सूची में दर्ज होना आवश्यक है।

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