बोया पेड़ बबूल का, आम कहां से आएं; क्या पाकिस्तान का अंत शुरू
blasts in pakistan 2025: POK में प्रदर्शन, क्वेटा में कार बम धमाका, 10 की मौत, 24 घायल। वायरल वीडियो और आतंकी संगठन फिर चर्चा में।

blasts in pakistan 2025: बोया पेड़ बबूल का, आम कहां से आएं…। ये चर्चित कहावत pakistan पर बिल्कुल सटीक बैठती है। पाक अधिकृत कश्मीर (POK) में अभी बवाल थमा नहीं कि क्वेटा शहर में भीषण बम धमाके की खबर सामने आ गई। कार बम धमाके में दस नागरिकों की मौत और दो दर्जन से अधिक के घायल होने की खबर ने शहबाज सरकार के होश उड़ा दिए हैं।
बम धमाके का वीडियो वायरल (Pakistan blasts 2025)
सोशल मीडिया पर बम धमाके का वीडियो वायरल है। सड़क पर तेज रफ्तार से दौड़ती कार में अचानक भीषण धमाका होने से आसपास काले धुएं का गुब्बार उठता नजर आता है। धुआं छंटने पर चीख-पुकार सुनाई पड़ती है। ये हृदय विदारक घटना वाकई विचलित करती है। वैसे pakistan में इस प्रकार की घटना होना कोई नई बात नहीं है। pakistan में blasts का पुराना रिकॉर्ड है। इसके लिए मुख्य रूप से सेना और सरकारें जिम्मेदार रही हैं। जिन्होंने देश में आतंकवाद को न सिर्फ पनपने दिया बल्कि उसकी जड़ में हमेशा खाद्य-पानी डाला गया।
कई आतंकी संगठन मौजूद (different terrorist organizations in pakistan)
विभिन्न आतंकवादी संगठन आज भी pakistan की सरजमीं पर मौजूद हैं। सेना और सरकार का समर्थन मिलने के कारण यह संगठन बेकाबू हो चुके हैं। POK भी इस वक्त उबल रहा है। शहबाज सरकार के खिलाफ बड़ी संख्या में नागरिक सड़कों पर उतर कर हुड़दंग मचा रहे हैं। ऐसे में जनजीवन अस्त-व्यस्त है। आवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में यह आंदोलन जंगल की आग की भांति फैल रहा है। कमेटी के लीडर शौकत नवाज़ मीर का तीखा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि “ये जूतों से मनाने वाले हैं, बातों से नहीं।”
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POK को संभालने में सेना व सरकार पूरी तरह से विफल नजर आते हैं। यह जगजाहिर तथ्य है कि pakistan के संचालन में सरकार की बजाए सेना का महत्वपूर्ण रोल है। सरकार को सेना की कठपुतली माना जाता है। सेना से तालमेल बिगड़ने पर सरकार का जाना तय होता है। POK के खराब हालात पर भारत की पैनी नजर है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में बयान दिया था कि POK पर कब्जा करने के लिए आक्रमण की जरूरत नहीं पड़ेगी। POK एक दिन खुद कहेगा कि मैं भारत हूं। दुनिया भर में आतंकवाद का जिक्र होने पर जुबान पर सबसे पहले pakistan का नाम आता है।
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इससे उसकी छवि का पता चलता है। जो मुल्क ओसामा बिन लादेन, दाऊद इब्राहिम, मौलाना मसूद अजहर जैसे कुख्यात आतंकियों को शरण देकर दूसरे मुल्कों में आतंकवाद फैलाता रहा है, वहां अमन-चैन कायम रहने की उम्मीद कभी नहीं की जा सकती है। कभी POK तो कभी बलूचिस्तान में जनता की सरकार विरोधी मुहिम देखने को मिलती है। जन आक्रोश को ताकत के दम पर शांत करने की कोशिश भी होती है, मगर बात नहीं बन पाती। एक तरफ pakistan के हुक्मरान परमाणु बम का दंभ भरकर मुस्लिम देशों की सुरक्षा छतरी बनने का दावा करते हैं, दूसरी ओर वह अपने ही मुल्क को सुरक्षित नहीं रख पा रहे हैं।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद पर घिरने पर pakistan खुद को इस समस्या से पीड़ित बताकर अपना बचाव करता है। हालांकि सच्चाई किसी से छिपी नहीं है। फिलहाल POK में धधकी आग आसानी से बुझने के आसार नहीं हैं। सरकार को जनता की मांगों पर ध्यान देना होगा। अन्यथा स्थिति बद से बदतर होने में देर नहीं लगेगी।
बता दें कि 2025 में pakistan blasts से वहां की आवाम डर के साए में जीने को मजबूर है।



