Aravalli Range Issue: बिना अरावली कैसा होगा भारत, वो 5 बड़े खतरे जो आपकी नींद उड़ा देंगे
Aravalli Range Issue: भारत में अरावली पर्वत श्रेणियां सिर्फ एक भू-आकृति नहीं हैं बल्कि उत्तर भारत के लिए इनकी अत्यधिक महत्ता है। हाल ही में पर्यावरण कार्यकर्ता चेतावनी दे रहे हैं कि इन पहाड़ियों का अस्तित्व खतरे में है और इसका प्रभाव न सिर्फ पर्यावरण पर बल्कि पूरे क्षेत्र के जीवन पर भी पड़ेगा।
क्या है मामला
नई परिभाषा के अनुसार, अरावली श्रृंखला में सिर्फ वे पहाड़ियां शामिल होंगी जो कम से कम 100 मीटर ऊंची हों। इस परिवर्तन से लगभग 90% पहाड़ियां संरक्षण से बाहर हो जाएंगी। इसका मतलब है कि यहां खनन, निर्माण कार्य, वृक्षों की कटाई और अन्य पर्यावरणीय नुकसान बढ़ सकते हैं।
अरावली की महत्ता (Why Aravalli is important)
अरावली पर्वत श्रृंखला भारत की प्राचीनतम पर्वत श्रृंखलाओं में एक है। यह गुजरात से लेकर राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक फैली हुई है और उत्तर भारत की सांस, सुरक्षा का प्रतीक और आधारशिला बनती है। अगर ये पहाड़ियां नष्ट हो जाएं, तो यह पूरा क्षेत्र पर्यावरणीय और जीवन संकट का सामना करेगा।
5 बड़े खतरे आ सकते हैं
रेगिस्तान के फैलाव को रोकना
अरावली पहाड़ियां थार रेगिस्तान के विस्तार को रोकती हैं। इनका नष्ट होना उत्तर भारत को रेगिस्तानी बना सकता है, जिससे कृषि और जल संकट बढ़ सकता है।
मानसून और वर्षा के पैटर्न को प्रभावित करना
अरावली पहाड़ियां मानसून के मार्गदर्शन में मदद करती हैं। इनके विनाश से अनियंत्रित बारिश और सूखा बढ़ सकता है, जिससे किसान परेशान हो सकते हैं।
जल स्तर का पुनः भरण
अरावली की चट्टानें प्राकृतिक जलाशयों की तरह काम करती हैं, जो वर्षा का पानी भूमि में समाहित करती हैं और जलस्तर को बनाए रखती हैं। इनके नष्ट होने से उत्तर भारत में पानी की भारी कमी हो सकती है।
प्रदूषण और धूल से सुरक्षा
अरावली पहाड़ियां दिल्ली और आस-पास के इलाकों में धूल और प्रदूषण को नियंत्रित करती हैं। इनके खत्म होने से वायु गुणवत्ता और गिर सकती है, जिससे श्वसन संबंधी बीमारियां बढ़ सकती हैं।
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जैव विविधता का संरक्षण
अरावली में विभिन्न प्रजातियों के पौधे, जीव-जंतु और पक्षी पाए जाते हैं। इनका नष्ट होना पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करेगा और कई प्रजातियां विलुप्त हो सकती हैं, जो खाद्य श्रृंखला को भी प्रभावित करेगी।



