सैफई आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के “शुक्ल पक्ष” की भी चर्चा हो
अतीत की कालिमा कुलपति के एक वर्ष के कायाकल्प प्रयासों से ही हुई धवल

सेंफई,इटावा। इटावा जनपद में अपनी स्थापना के बाद से ही सैफई स्थित उत्तर प्रदेश ग्रामीण आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान (यूपीआरआईएमएस -2005),जो अब उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (यूपीयूएमएस-2016) के रूप में जाना जाता है, लगातार चर्चा में रहा है, चूंकि सैफई एक राजपरिवार का पैतृक स्थान भी है तो कई बार कथित राजनैतिक कारणों के चलते भी इस स्वास्थ्य-शिक्षा संस्थान को अनेक प्रकार के आक्षेपों और अवांछनीय अपवंचनाओं का सामना करना पड़ा है तो कई बार इस मेडिकल संस्थान में लोकल स्टाफ, समय समय पर आने वाले कुलपतियों और कुछ अयोग्य अराजक मानसिकता वाले चिकित्सकों और अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर भी यूपीयूएमएस की साख पर कालिमा चढ़ती रही है।
और मीडिया को तो ऐसी नकारात्मक बातों से ही टीआरपी मिलती है, लिहाजा सत्यता को प्रमाणित किए बिना ही उनकी कलम आरोपों और आलोचनाओं की गठरियां खोलने लगती है। ऐसे बड़े मेडिकल संस्थान,जहां एक-एक दिन में चार-चार, पांच-पांच हजार की संख्या में मरीज आते जाते हों और जहां हजारों कर्मचारी काम करते हों,वहां कमियां नहीं होती होंगी, कोई अव्यवस्था नहीं होती होगी, मैं ऐसा नहीं कह रहा, लेकिन क्या ऐसे इंस्टीट्यूटों का सिर्फ़ स्याह चेहरा ही मीडिया को नजर आता है, उन्हें कभी उसका कोई उजला पक्ष दिखाई क्यों नहीं देता है? अगर कृष्ण पक्ष होता है तो शुक्ल पक्ष भी तो होता है। तो उस शुक्ल पक्ष की चर्चा मीडिया क्यों नहीं करता? ये तो वही कहावत हुई कि गिलास आधा पानी से भरा हुआ था,एक ने कहा गिलास आधा खाली है तो दूसरे ने कहा गिलास आधा भरा है। बात सोच और दृष्टिकोण की है कि आप केवल नकारात्मक देखते हैं या आपको उसमें कुछ सकारात्मक भी नज़र आता है।
हालांकि,इस सच्चाई से भी पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता कि सैफई में स्थापित आयुर्विज्ञान संस्थान व विश्वविद्यालय का अतीत अनेक तरह की कालिमाओं से लांक्षित रहा है,और उसकी वजहें चाहे जो भी,राजनैतिक या क्षेत्रीय रही हों,लेकिन अब इस संस्थान में व्यवस्था सम्बन्धी कायाकल्प किए जाने के जो अभिनव प्रयास हो रहे हैं,उसके लिए विश्विद्यालय के वर्तमान कुलपति डा.अजय सिंह की संयमित,अनुभवी और अनुशासित कार्यशैली की सराहना ज़रूर की जानी चाहिए।
उन्होंने लगभग एक सवा वर्ष पूर्व यहां का चार्ज संभालने के बाद जो पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस की, और उसमें जो अपना विजन स्पष्ट किया,उसी दिन यह संकेत मिल गया था कि इस यूपीयूएमएस का वर्तमान और भविष्य, अपने अतीत की कालिमाओं से उबर कर अब एक नई धवलता को हासिल अवश्य करेगा।
इस एक साल में कुलपति डा.अजय सिंह ने समूचे संस्थान के इंफ्रास्ट्रक्चर, समस्त फैकल्टी और संस्थान में कार्यरत एम्प्लाइज को अपने गहन अनुभव और अनुशासित कार्यशैली से जिस तरह सुव्यवस्थित कर अभूतपूर्व उपलब्धियों से जोड़ा है,वह उल्लेखनीय ही नहीं,अभूतपूर्व भी है।
ज़ाहिर है,जब किसी संस्थान में सुधारात्मक प्रयास किए जाते हैं, तो वहां जो कुंडली मारकर बैठे हुए लोग हैं,उनमें विचलन होना स्वाभाविक है, और तब वे अच्छा करने वाले को बदनाम कर उसे परेशानी में डालने वाले नाना प्रकार के षडयंत्र रचा करते हैं ताकि वे अपनी जगह जमे रहकर पहले की तरह खूब माल-मत्ता बटोरते हुए अपनी मौज मस्ती में डूबे रहें।
पर कुलपति डा.अजय सिंह की पैनी नज़र ने इस भ्रष्ट और अनैतिक नैक्सस,जो इस इंस्टीट्यूट के लिए नासूर साबित हो रहा था,को भी पहचान लिया और उसका भी ऐसा इलाज़ कर दिया कि लोग आश्चर्य कर रहे हैं,कि सैफई के इस मेडिकल संस्थान में रसूखदारी का संरक्षण रखने वाले डाक्टरों और कर्मचारियों पर भी कोई अनुशासन का डंडा चला सकता है।
पर ऐसा हुआ है। तो जैसे देश की व्यवस्था के सुधार के प्रयासों में लगे हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बाहरी और भीतरी,न जाने कितने तरह के षड्यंत्रों, बदनामियों और लांछनों का सामना करना पड़ रहा है,उसी तरह कुलपति डा. अजय सिंह द्वारा सैफई के इस इंस्टीट्यूट में नवाचार,सेवा,शिक्षा और शोध के जो अभिनव प्रयास किए जा रहे हैं, उससे इसी संस्थान में कार्यरत कुछ चिकित्सक, अधिकारी और कर्मचारी ईर्ष्या से भरकर प्रायोजित मीडिया मैनेज के माध्यम से एक यशस्वी कुलपति को भी लांक्षित करने की साजिशें रचने में लग गए हैं।
लेकिन साँच को आंच कहां लगती है। कुलपति डा.अजय सिंह ने सैफई के इस मेडिकल इंस्टीट्यूट के कायाकल्प के लिए मात्र साल सवा साल में ही जो अथक प्रयास किए हैं, उसके सुपरिणाम सबके सामने हैं, और स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उनके इस एक साल के कार्यकाल में इस संस्थान को मिली अभूतपूर्व उपलब्धियों की सराहना कर चुके हैं, और कुलपति को आश्वस्त भी किया है कि ग्रामीण भारत की जनता के हितार्थ उसे गुणवत्तापूर्ण, सुलभ, एवं आधुनिकतम स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ साथ चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के उद्देश्य से स्थापित किए गए इस आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के माध्यम से जितना अधिक से अधिक स्वास्थ्य लाभ लोगों को तथा विश्विद्यालय में चिकित्सीय शिक्षा ग्रहण करने आने वाले छात्र छात्राओं को दिलाया जा सके, वह बिना किसी क्षेत्रीय अथवा राजनैतिक भेदभाव के उन्हें सुलभ कराया जाय, इसके लिए पर्याप्त बजट देने में कोई संकोच नहीं किया जायेगा। और ऐसा ज्ञात भी हुआ है कि पूर्व की तुलना में अब सैफई स्थित इस यूपीयूएमएस को चार गुना अधिक बजट उपलब्ध भी कराया जा रहा है।
निश्चित रूप से इस उज्जवल और गौरवशाली उपलब्धि के लिए इस इंस्टीट्यूट के वर्तमान कुलपति डा.अजय सिंह के यशस्वी प्रयासों के लिए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी जानी चाहिए।



