भारत अपग्रेड करने जा रहा है ये मिसाइल, रेंज में आएगा पूरा पाकिस्तान

ELRGR 300 KM Range: भारत का ‘पिनाका’ मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम लंबे समय से भारतीय सेना की तोपखाने (आर्टिलरी) क्षमताओं का एक अहम हिस्सा रहा है। अब इस सिस्टम को और विस्तार देने की कोशिशें चल रही हैं।

इसका लक्ष्य 370 mm व्यास वाला एक ‘एक्सटेंडेड लॉन्ग-रेंज रॉकेट’ (ELRGR) विकसित करना है, जो 300 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम होगा। ये डिज़ाइन, पिनाका के पुराने वर्ज़न में इस्तेमाल होने वाले 214 mm रॉकेटों की तुलना में काफी बड़ा है, जिससे इसमें ज़्यादा ईंधन और भारी पेलोड ले जाया जा सकेगा। इसमें एक सटीक नेविगेशन सिस्टम भी शामिल किया जा सकता है। इस विकास को भारत की रक्षा अनुसंधान और विनिर्माण क्षमताओं को मज़बूत करने की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

पूरे पाकिस्तान पर नज़र

अगर इसे पश्चिमी सीमा के पास से लॉन्च किया जाए, तो इसकी 300 किलोमीटर की रेंज पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कई महत्वपूर्ण इलाकों तक पहुँच सकती है। लाहौर, सियालकोट और गुजरांवाला जैसे शहर—साथ ही आस-पास के सैन्य कमांड सेंटर, लॉजिस्टिक्स हब, एयरफील्ड और एयर डिफेंस सिस्टम—इसकी पहुँच में आ सकते हैं।

सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, यह क्षमता पाकिस्तानी सैन्य योजनाकारों के लिए एक चुनौती बन सकती है, क्योंकि इससे उनके पिछले (रियर) इलाकों को सुरक्षित रखना काफी मुश्किल हो जाएगा। कम रेंज वाले पिनाका वर्ज़न और ‘प्रलय’ मिसाइल के साथ मिलकर, यह सिस्टम भारतीय सेना को एक बहु-स्तरीय, ‘डीप-स्ट्राइक’ (गहरी मार करने वाली) क्षमता प्रदान कर सकता है।

ये अपग्रेड कैसे किया जा रहा है?

वर्तमान प्रयास इसके विकास, परीक्षण और सेना में शामिल करने की प्रक्रिया को तेज़ करने पर केंद्रित हैं। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और इससे जुड़ी एजेंसियां ​​इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं। सफल परीक्षणों के बाद, इस सिस्टम को जल्द से जल्द सेना में शामिल करने के कदम उठाए जाएंगे।

पिनाका सिस्टम पहले ही कई ऑपरेशनल मिशनों में अपनी उपयोगिता साबित कर चुका है। इसकी गतिशीलता (मोबिलिटी), तेज़ी से हमला करने की क्षमता और लंबी रेंज इसे और भी प्रभावी बनाती है। 300 किलोमीटर की रेंज के साथ, यह न केवल पारंपरिक तोपखाने की सीमाओं को दूर करता है, बल्कि मिसाइल और रॉकेट सिस्टम के बीच के अंतर को भी पाटता है।

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विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की क्षमताएं ‘डिटेरेंस’ (दुश्मन को रोकने की ताकत) को बढ़ाती हैं; हालाँकि, इनकी तैनाती से जुड़े फैसले हमेशा राजनीतिक और रणनीतिक नियंत्रण के दायरे में ही होने चाहिए। विकास की गति और आगे होने वाले सफल परीक्षणों के परिणाम यह तय करेंगे कि यह प्रणाली कब पूरी तरह से चालू होगी।

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