10 अक्टूबर को शनि अमावस्या का बड़ा संयोग: इन 3 राशियों की बढ़ेंगी मुश्किलें, जानें बचाव के अचूक उपाय

Shani Amavasya 2026: पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ हो रहा है, जो शनिवार के दिन पड़ने की वजह से अत्यंत फलदायी ‘शनि अमावस्या’ का दुर्लभ संयोग बना रही है।
वैदिक ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस दिन कन्या राशि में ग्रहों के राजा सूर्य और मन के कारक चंद्रमा एक साथ विराजमान होकर ‘अमावस्या योग’ का निर्माण करेंगे। कन्या राशि में बनने वाली इस विशेष युति का असर सभी 12 राशियों पर दिखेगा, लेकिन तीन विशेष राशियों—कन्या, तुला और मीन—के जातकों को मानसिक बेचैनी, अप्रत्याशित आर्थिक नुकसान और करियर में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ज्योतिषाचार्यों ने इन राशि वालों को इस दौरान विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
इस राशि पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
सूर्य-चंद्र की यह युति स्वयं कन्या राशि में घटित हो रही है, जिसके चलते इसका सर्वाधिक असर इसी राशि के जातकों पर दिखाई देगा। कन्या राशि वालों को शारीरिक व्याधियों, मानसिक तनाव और अचानक बढ़ते अनियंत्रित खर्चों से जूझना पड़ सकता है, इसलिए किसी भी कागजी कार्रवाई या फैसले में जल्दबाजी से बचना ही समझदारी होगी। वहीं तुला राशि के जातकों के लिए यह ग्रह गोचर बारहवें भाव यानी व्यय भाव में हो रहा है, जिसके प्रभाव से बजट बिगड़ने और अनावश्यक धन हानि की पूरी आशंका बनी हुई है। इस दौरान तुला राशि वालों को जोखिम भरे निवेश से पूरी तरह दूर रहना होगा और माता-पिता के स्वास्थ्य को लेकर भी अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ेगी। तीसरी प्रभावित राशि मीन है, जिसके सातवें यानी साझेदारी और दांपत्य भाव में यह युति बन रही है। व्यापारिक साझेदारी में धोखे की आशंका और वैवाहिक जीवन में अकारण तनाव या विवाद खड़े हो सकते हैं, इसलिए संवाद और संयम बनाए रखना बेहद जरूरी रहेगा।
पितरों की थाली में जरूर रखें ये 5 पकवान, दूर होगा पितृ दोष; भूलकर भी न करें ये एक गलती
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस अमावस्या योग के दुष्प्रभावों को कम करने और ग्रहों को शांत करने के लिए शास्त्रों में कुछ अचूक और सरल उपाय बताए गए हैं। शनिवार की शाम को पीपल के वृक्ष की जड़ में सरसों के तेल का चौमुखा दीपक प्रज्वलित करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है। इसके अलावा शिवलिंग पर कच्चा दूध व जल अर्पित करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ का रुद्राक्ष माला से जप करें। शनि देव और पितरों की शांति के लिए काले तिल, उड़द की दाल और काले वस्त्रों का दान जरूरतमंदों को करें। सूर्य व चंद्रमा की अशुभता दूर करने के लिए हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से सभी संकटों का निवारण होता है।



