छोटे बच्चे को हो गई है कब्ज; तुरंत अपनाएं ये 5 आसान घरेलू उपाय, पेट दर्द से मिलेगी राहत

Constipation In Kids Home Remedies: शिशुओं और छोटे बच्चों में कब्ज की समस्या माता-पिता के लिए बेहद तनावपूर्ण स्थिति बन जाती है। पेट साफ न होने पर बच्चा रोने लगता है, शौच के समय अत्यधिक जोर लगाता है और अक्सर पेट में मरोड़ या दर्द की शिकायत करता है।

कई बार सख्त मल और शौच के दौरान होने वाले तीव्र दर्द के डर से मासूम पॉटी को रोकने की आदत बना लेते हैं, जिससे मल और अधिक कड़ा हो जाता है तथा समस्या विकराल रूप ले लेती है। शरीर में पानी की कमी, आहार में ताजे फलों-सब्जियों का अभाव और मल त्याग को टालना इसके प्रमुख कारण बनते हैं। ऐसे में दैनिक खानपान और दिनचर्या में कुछ सरल सुधार करके बच्चे को इस तकलीफ से आसानी से निजात दिलाई जा सकती है।

भीगी हुई काली किशमिश का कराएं सेवन

काली किशमिश प्राकृतिक घुलनशील फाइबर से भरपूर होती है, जो आंतों की सक्रियता बढ़ाकर पाचन तंत्र को दुरुस्त करती है। यदि बच्चा ठोस आहार चबाने में सक्षम है, तो रातभर पानी में भिगोई गई 4-5 किशमिश सुबह पूरी तरह नरम होने पर उसे खिलाई जा सकती हैं। हालांकि बहुत छोटे नवजात या चबाने में असमर्थ बच्चों को साबुत किशमिश बिल्कुल न दें क्योंकि इससे गले में अटकने का खतरा रहता है। बच्चे की उम्र और वजन के अनुसार उचित मात्रा तय करने के लिए बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना हमेशा बेहतर रहता है।

जीरा और सौंफ का पानी देते समय बरतें सावधानी

पारंपरिक तौर पर भारतीय घरों में अपच और पेट की दिक्कतों के लिए जीरा-सौंफ के अर्क का उपयोग खूब किया जाता है, लेकिन नन्हे बच्चों के नाजुक पाचन तंत्र पर इसके प्रभाव को लेकर ठोस चिकित्सकीय प्रमाण सीमित हैं। विशेष रूप से एक वर्ष से कम उम्र के शिशुओं को ऐसा कोई भी काढ़ा या घरेलू पेय डॉक्टर की पूर्व अनुमति के बिना देने से बचना चाहिए।

हाइड्रेशन का रखें खास ख्याल, बार-बार पिलाएं पानी

शरीर में जलस्तर कम होने पर बड़ी आंत मल से अतिरिक्त पानी सोख लेती है, जिससे पॉटी अत्यंत सख्त हो जाती है। बच्चे को कब्ज से बचाने के लिए पूरे दिन नियमित अंतराल पर गुनगुना या सादा पानी पिलाना सुनिश्चित करें। एक साथ ढेर सारा पानी पिलाने के स्थान पर थोड़ी-थोड़ी देर में घूंट-घूंट पानी देना पाचन क्रिया को सुगम बनाता है।

थाली में बढ़ाएं मौसमी फल और हरी सब्जियां

बच्चों की आंतों को गतिशील बनाए रखने के लिए आहार में फाइबर की पर्याप्त मौजूदगी अनिवार्य है। नाशपाती, सेब, पपीता, आलूबुखारा और उबली हुई हरी सब्जियों को बच्चे की पसंदीदा प्यूरी या खिचड़ी में मिलाकर दें। यदि बच्चा सब्जियां खाने में आनाकानी करता है, तो उसे धीरे-धीरे रचनात्मक अंदाज में भोजन में शामिल करने की आदत विकसित करें।

शौच रोकने की आदत पर दें विशेष ध्यान

दर्द के खौफ से मल रोकने वाले बच्चों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाना बेहद आवश्यक है। बच्चे पर गुस्सा करने या दबाव बनाने के बजाय उसे समझाएं कि पॉटी न रोकने से पेट का दर्द दूर होगा। नियमित समय पर पॉटी सीट पर बैठने की आरामदायक आदत डालें।

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गंभीर लक्षणों पर तुरंत लें डॉक्टरी परामर्श

यदि घरेलू बदलावों के बाद भी समस्या बनी रहे, बच्चे के पेट में लगातार असहनीय दर्द हो, उल्टी की शिकायत हो, पेट असामान्य रूप से फूला रहे या शौच के साथ खून के धब्बे नजर आएं, तो बिना समय गंवाए पीडियाट्रिशियन को दिखाएं। प्रत्येक बच्चे की शारीरिक संरचना और पाचन क्षमता भिन्न होती है, इसलिए किसी अन्य पर असर करने वाला नुस्खा आपके बच्चे के लिए भी मुफीद हो, यह अनिवार्य नहीं है।

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