17 अगस्त को विद्युत विभाग के आउटसोर्स कर्मचारी ऊर्जा मंत्री के आवास पर ऊर्जा मंत्री से बयां करेंगे अपना दर्द

14 अगस्त लखनऊ के इको गार्डन आलमबाग लखनऊ सहित प्रदेश के भिन्न-भिन्न जनपदों में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन।

सुलतानपुर |विद्युत विभाग आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्य कर रहे कर्मचारियों का कार्य के दौरान बिजली कि चपेट में आने या खम्भे से निचे गिर जाने से दुर्घटनाओं में बड़े पैमाने पर मृत्यु हो रही है,जिसको ध्यान में रखकर संगठन द्वारा मृतक कर्मचारियों कि पुण्य आत्मा कि शान्ति के लिए 14 अगस्त 2026 को लखनऊ के इको गार्डन आलमबाग लखनऊ सहित प्रदेश के भिन्न-भिन्न जनपदों में श्रद्धांजलि सभा करने का निर्णय लिया गया है।

जिलाध्यक्ष आनंद कुमार अग्रहरी ने आउटसोर्स कर्मचारियों के दुर्घटनाओं के मुख्य कारण के बारे में बताया कि कर्मचारियों कि भारी कमी। उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन द्वारा वर्ष 2017 में 33/11 के वी विद्युत उपकेंद्रों के परिचालन व अनुरक्षण कार्य हेतु कर्मचारियों को तैनात करने का आदेश निर्गत किया गया है जिसमें कहा गया है कि-

1- यह कि विद्युत उपकेन्द्रो के परिचालन कार्य में 4 उपकेन्द्र परिचालक व 4 सहायक सहित कुल 8 कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा तथा इसी के हिसाब से कर्मचारियों को तैनात किया गया था किन्तु वर्तमान समय 8 कर्मचारियों के स्थान पर मात्र 3 कर्मचारियों से परिचालन का कार्य कराया जा रहा है, जिसके कारण दुर्घटनाओं में आउटसोर्स कर्मचारियों कि मृत्यु हो रही है।

2- यह कि विद्युत उपकेन्द्रो के अनुरक्षण कार्य में प्रति 11 KV आउटगोइंग फीडर पर 01 गैंग जिसमें 1 लाइन मैन+ 1 पेट्रोल मैन/ कुशल श्रमिक व 2 अकुशल श्रमिक सहित कुल 4 कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा तथा इसी के हिसाब से कर्मचारी तैनात किए गए थे किन्तु वर्तमान समय में अब गैंग का कोई अर्थ नहीं रह गया है बल्कि मनमाने तरीके से दबाव बनाकर कार्य कराया जा रहा है।

बोर्ड आर्डर के अनुसार लाइन मैन ही खम्भे पर चढ़कर लाइन का कार्य कर सकता है पेट्रोल मैन व कुशल श्रमिक को सिढी पर 5 डंडे से ऊपर चढ़ने का आदेश नहीं है तथा बिजली विभाग के पास लाइन मैन आवश्यकता के 5 प्रतिशत भाग के बराबर भी नहीं बचे हैं और जो कुशल श्रमिक लाइन मैनो की कार्य कुशलता हासिल कर चुके थे उन्हें पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन द्वारा 55 वर्ष का हवाला देकर कार्य से हटा दिया गया है तथा कर्मचारियों कि भारी कमी और उपभोक्ताओं कि दिन प्रतिदिन बढ़ती संख्या के कारण कुशल कर्मचारियों के साथ ही साथ अकुशल कर्मचारियों से भी जमीन से 25 से 30 फीट ऊपर 220 वोल्ट,440 वोल्ट, 11000 वोल्ट एवं 33000 वोल्ट की लाइनों पर कार्य कराया जा रहा है जिसके कारण आउटसोर्स कर्मचारियों कि दुर्घटनाओं में मृत्यु हो रही है।

बिजली लाइनों को एक दूसरे को नियम विरुद्ध क्रॉस करने एवं एक ही खम्भे पर एल टी और एच टी लाइनों को दौड़ाए जाने के कारण।

बिजली विभाग द्वारा बिजली के लाइनों को बनाते समय सुरक्षा मानकों को ध्यान में नहीं रखा गया है बल्कि मनमाने तरीके से एक लाइन को दूसरे लाइन से क्रास कराया गया है एवं एक ही खम्भे पर एल टी एवं एच टी लाइनों को दौड़ाया गया है जिसके कारण दुर्घटनाओं में बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों कि मृत्यु हो रही है।

सुरक्षा उपकरण का अभाव
बिजली विभाग में सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी हैं, जिसके कारण दुर्घटनाओं में बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों कि मृत्यु हो रही है। हालांकि पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन द्वारा 28.30 करोड़ रुपए सुरक्षा उपकरणों पर खर्च करने कि बात कही जा रही है लेकिन ये बात समझ से परे है कि इतनी बड़ी रकम कहां खर्च किया गया जबकि मुख्य सुरक्षा उपकरणों में से एक बांस कि सिढीं देहात के किसी भी बिजली घर पर उपलब्ध नहीं कराया गया है जिसकी जांच होनी चाहिए।
जिला महामंत्री अजय चौरसिया ने बताया कि
पावर कॉरपोरेशन प्रबन्धन द्वारा कार्य के अनुरूप अनुबंध न करने, वेतन भुगतान में भेदभाव करने, वेतन रुपया 18000 निर्धारित न करने, हटाए गए कर्मचारियों को कार्य पर वापस न लेने, बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों कि बड़े पैमाने पर हो रही दुर्घटनाओं पर अंकुश न लगाने, पावर कॉरपोरेशन प्रबन्धन द्वारा बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों को आउटसोर्स सेवा निगम में शामिल होने का विरोध करने, महिला कर्मचारियों को मूल भूत सुविधाएं न देने, श्रमायुक्त द्वारा निर्धारित अवकाश न देने आदि के कारण इको गार्डन में चल रहा धरना प्रदर्शन मंगलवार को 13 वे दिन भी जारी रहा।

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