हवाई जहाज़ की खिड़कियां छोटी और गोल क्यों होती हैं, जवाब उड़ा देगा आपके होश

Why airplane windows are round: बचपन से ही हर कोई हवाई जहाज़ों से आकर्षित होता है। उनके डिज़ाइन को देखकर अक्सर एक सवाल मन में आता है: जहाज़ों में बड़ी और चौकोर खिड़कियों के बजाय छोटी, गोल या अंडाकार खिड़कियाँ क्यों होती हैं, जबकि बड़ी खिड़कियों से बाहर के खूबसूरत नज़ारे बेहतर दिख सकते हैं? इसका जवाब आपको असल में हवाई जहाज़ से सफ़र करने के बाद ही मिलता है!
हवाई जहाज़ से सफ़र करते समय हर कोई ‘विंडो सीट’ पाना चाहता है। खिड़की से बादलों और नीचे के खूबसूरत नज़ारों को देखने में एक अलग ही मज़ा आता है। लेकिन क्या आपने कभी ध्यान से देखा है? घरों या कारों में पाई जाने वाली बड़ी और चौकोर खिड़कियों के उलट, हवाई जहाज़ की खिड़कियाँ छोटी और गोल क्यों होती हैं?
यह सिर्फ़ डिज़ाइन या सुंदरता की बात नहीं है; इसके पीछे यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा एक अहम वैज्ञानिक कारण है। आइए, इस रहस्य को जानते हैं!
1. हवाई जहाज़ का आकार और हवा का दबाव
जब हवाई जहाज़ 30,000 से 40,000 फ़ीट की ऊँचाई पर उड़ता है, तो बाहर हवा का दबाव बहुत कम होता है। यात्रियों को आराम से साँस लेने देने के लिए, जहाज़ के अंदर हवा का दबाव (केबिन प्रेशर) ज़्यादा और नियंत्रित स्तर पर बनाए रखना ज़रूरी होता है।
इससे जहाज़ के अंदर से बाहर की ओर काफ़ी दबाव बनता है। यह दबाव जहाज़ के ढाँचे पर हर तरफ़ से ज़ोर डालता है। अगर खिड़कियाँ बड़ी होतीं, तो जहाज़ की मुख्य बॉडी (फ्यूज़लेज) कमज़ोर हो सकती थी।
2. चौकोर के बजाय गोल क्यों?
शुरुआती दिनों (1950 के दशक) में हवाई जहाज़ों में चौकोर खिड़कियाँ होती थीं। हालाँकि, हवाई जहाज़ के डिज़ाइन और फ़िज़िक्स के हिसाब से, चौकोर खिड़की के चार नुकीले कोने होते हैं। इससे खिड़की के कोनों पर दरारें पड़ने और शीशा टूटने का बहुत ज़्यादा खतरा पैदा हो जाता है।
एक ऐतिहासिक घटना: 1953 में ‘डी हैविलैंड कॉमेट’ (De Havilland Comet) हवाई जहाज़ से जुड़े हादसे हुए थे। जांच से पता चला कि ये दुर्घटनाएं इसलिए हुईं क्योंकि चौकोर खिड़कियों के कोनों पर बहुत ज़्यादा दबाव पड़ने से खिड़की का शीशा टूट जाता था।
इसके बाद, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने खिड़की का आकार गोल (या अंडाकार) कर दिया। गोल आकार यह पक्का करता है कि हवा का दबाव पूरी खिड़की पर समान रूप से फैले, न कि किसी एक जगह पर केंद्रित हो, जिससे खिड़की के टूटने का खतरा खत्म हो जाता है।
3. खिड़कियां छोटी क्यों होती हैं?
स्ट्रक्चरल मज़बूती: हवाई जहाज़ की पूरी बॉडी एल्युमीनियम और मेटल अलॉय से बनी होती है। खिड़की जितनी बड़ी होगी, उतना ही ज़्यादा मेटल हटाना पड़ेगा, जिससे जहाज़ के स्ट्रक्चर की मज़बूती कम हो जाती है।
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कम वज़न: खिड़कियों के लिए इस्तेमाल होने वाला खास ‘एक्रिलिक ग्लास’ मेटल से भारी होता है। खिड़कियों को छोटा रखने से जहाज़ का वज़न कंट्रोल में रहता है, जिससे ईंधन की खपत कम होती है।
4. हवाई जहाज़ की खिड़की में छोटा सा छेद क्यों होता है?
आपने शायद हवाई जहाज़ की खिड़की के निचले हिस्से में एक छोटा सा छेद देखा होगा। हवाई जहाज़ की खिड़की तीन परतों (शीशों) से बनी होती है:
- बाहरी परत
- बीच की परत
- अंदर की परत (जिसे हम छू सकते हैं)
यह छोटा सा छेद बीच वाली परत में होता है। यह जहाज़ के अंदर और बाहर के दबाव को संतुलित करने में मदद करता है और खिड़कियों पर धुंध या भाप जमने से रोकता है।



